Uttarakhand Khabar: मानसून में बाढ़ और जलभराव की संभावना के चलते संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित
-
113 बाढ़ चौकियां बनीं
देवभूमि उत्तराखंड में मानसून में बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील 304 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जबकि 113 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। यह कहना है लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का। उन्होंने यह बात सिंचाई भवन सभागार में मानसून की तैयारियों को लेकर हुई सिंचाई और लोक निर्माण विभाग की बैठक में कही।
मंत्री ने बताया कि सभी जनपद मुख्यालयों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। देहरादून में भी एक बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे क्रियाशील है। केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के माध्यम से नदियों के जलस्तर और वर्षा के आंकड़े प्रतिदिन प्राप्त किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड में 15 जून से पहले ही कुल 113 बाढ़ चौकियां स्थापित कर लीं गई हैं। साथ ही सड़कों के अवरुद्ध होने पर वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने के निर्देश जारी की दिए गए हैं। बैठक में महावीर चौहान, अपर सचिव विनीत कुमार, लोनिवि के प्रमुख अभियंता रमेश चंद्र शर्मा, अपर सचिव सिंचाई गरिमा रौंकली, सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष कुमार आदि उपस्थित रहे।
जलाशयों के बांधों पर लगातार निगरानी
मानसून से पूर्व नदियों के संवेदनशील स्थलों पर चैनेलाइजेशन का कार्य जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। विभिन्न शहरों में जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए जीआईएस आधारित जल निकासी योजना तैयार की गई है। हरिद्वार के भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी का कार्य पूरा हो चुका है। सिंचाई विभाग के जलाशयों के बांधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आपात स्थिति के लिए बोल्डर, आरबीएम और रेत की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
लोगों को सड़कों को सूचना पहले ही देने के निर्देश…
बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि लोगों को सड़क बंद होने पर पहले ही सूचना मिल जाए। ताकि अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्री वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर सकेंगे। वहीं सभी सड़कों के उचित रखरखाव के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने लक्ष्य 3946 पैचवर्क के मुकाबले 3968 पैचवर्क पूरे किए हैं। 1199 सड़कें जो हर सीजन में प्रभावित होती है को लेकर वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने के लिए कहा गया है।
