May 10, 2026

Bengal: चुनाव में करारी हार के बाद TMC में घमासान…. विधायकों ने खोला आलाकमान के खिलाफ मार्चा

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कोलकाता।
पश्चिम बंगाल (West Bengal ) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) के हाथों मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरखाने भारी घमासान शुरू हो गया है। इतने सालों तक पार्टी लाइन का सख्ती से पालन करने वाले कई विधायक और दिग्गज नेता अब अपनी ही लीडरशिप के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। पूर्व क्रिकेटर और मंत्री रहे मनोज तिवारी से लेकर सांसद-अभिनेता देव तक ने पार्टी आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ नेताओं ने तो चुनाव में हुई इस हार का सीधा ठीकरा महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के सिर फोड़ दिया है। हार के बाद ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के फैसले पर भी कई विधायकों ने असहमति जताई है।


गुटबाजी और ‘लॉबी’ को ठहराया हार का जिम्मेदार

पार्टी के कई विधायकों ने खुलेआम गुटबाजी को हार की सबसे बड़ी वजह बताया है। मुर्शिदाबाद के हरिहरपारा से टीएमसी विधायक नियामत शेख ने सीधे तौर पर कहा, “पार्टी में सिर्फ लॉबी और गुटबाजी हावी है।” उन्होंने इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। नियामत शेख ने बताया कि उन्होंने बार-बार आलाकमान को मुर्शिदाबाद में बढ़ती गुटबाजी को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आलाकमान पर आरोप लगाया कि जमीनी हकीकत यानी ‘ह्यूमन फैक्टर’ को नजरअंदाज कर सोशल मीडिया और तकनीक पर ज्यादा भरोसा किया गया।

शेख ने चुनाव से ठीक पहले हुमायूं कबीर को सस्पेंड किए जाने को भी गलत फैसला बताया। हुमायूं कबीर ने बाद में अपनी नई पार्टी (AUJP) बनाई और दो सीटें जीतीं, जिससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो गया।


मुस्लिम वोटों का बंटवारा और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज से टीएमसी विधायक अखरुज्जमां ने भी अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में हार का कारण मुस्लिम वोटों के बंटवारे को माना है। उनका कहना था कि मुसलमानों ने टीएमसी और बीजेपी को छोड़कर बाकी सबको वोट दिया। एक अन्य टीएमसी विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारा मुस्लिम वोट बैंक बिखर गया, जबकि हिंदू वोट पूरी तरह से एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में चला गया। इस विधायक ने चुनावी रणनीतिकार एजेंसी (I-PAC) पर अत्यधिक निर्भर रहने और उन्हें ‘बिचौलिया’ बना देने पर भी भारी नाराजगी जताई।

ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर अपनों के ही सवाल
विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। अब इस फैसले पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। हावड़ा के बागनान से चार बार के विधायक अरुणभ सेन ने तंज कसते हुए कहा, “ममता बनर्जी एक बड़ा नाम हैं। लेकिन अगर मैं उनकी जगह होता, तो इतनी बड़ी हार के बाद निश्चित तौर पर इस्तीफा दे देता।”

एक अन्य विधायक ने कहा कि हमें हार स्वीकार करनी चाहिए। हार न मानने की जिद लोगों के बीच पार्टी की छवि को और खराब कर रही है। हालांकि, वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का बचाव करते हुए कहा कि इस्तीफा न देने का फैसला ममता का अकेले का नहीं था, बल्कि यह सभी निर्वाचित विधायकों का सर्वसम्मत फैसला था।


देव और मनोज तिवारी का सीधा हमला

सांसद देव की नाराजगी: लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले और विधानसभा चुनाव में प्रचार करने वाले अभिनेता देव ने मीडिया से कहा कि वह ‘घाटल मास्टरप्लान’ को लेकर अब झूठ नहीं बोलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता और अभिषेक बनर्जी ने उन्हें झूठा भरोसा दिया था कि बाढ़ नियंत्रण से जुड़े इस लंबे समय से लटके प्रोजेक्ट को जल्द पूरा किया जाएगा।

मनोज तिवारी के गंभीर आरोप: चुनाव परिणाम आने के महज दो दिन बाद पूर्व खेल राज्य मंत्री मनोज तिवारी ने एक फेसबुक लाइव में टीएमसी सरकार को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए कहा कि इसे सत्ता से उखाड़ फेंकना ही सही था। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने उन्हें सरकार में पूरी तरह किनारे कर दिया था। तिवारी ने बीजेपी को उसकी इस ‘प्रचंड जीत’ के लिए बधाई भी दी।

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: मालदा के मालतीपुर से विधायक अब्दुर रहीम बोक्सी और केएमसी के डिप्टी मेयर अतिन घोष ने चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को हार का बड़ा कारण बताया। अतिन घोष ने राज्यभर में चल रही भारी सत्ता विरोधी लहर और धार्मिक ध्रुवीकरण को भी हार की वजह बताया।

पार्टी के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी को देखते हुए टीएमसी ने अपने 5 प्रवक्ताओं- रिजू दत्ता, कृष्णेंदु चौधरी, कोहिनूर मजूमदार, पापिया घोष और कार्तिक घोष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोहिनूर मजूमदार और कृष्णेंदु चौधरी ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके की आलोचना की थी, जबकि रिजू दत्ता ने चुनाव के बाद हुई हिंसा को रोकने के लिए बीजेपी के उठाए गए कदमों की तारीफ की थी।

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