कम पानी से बढ़ता है किडनी स्टोन का खतरा, आयुर्वेदिक काढ़ा साबित हुआ कारगर, दर्द और पथरी दोनों में मिली राहत
अध्ययन में 40 किडनी स्टोन के मरीजों को 90 दिनों तक दिन में दो बार 30 मिलीलीटर श्वद्रंष्ट्रादि क्वाथ दिया गया। इसके साथ गुनगुना पानी पीना और आयुर्वेदिक आहार नियमों का पालन अनिवार्य रखा गया। परिणाम स्वरूप 73% मरीजों में दर्द और जलन में राहत मिली और पथरी का आकार भी आधा हो गया।
अद्भुत केस स्टडीज
42 वर्षीय अंबिका मिश्रा, जिनकी पथरी 4 एमएम थी, तीन महीने के आयुर्वेदिक इलाज के बाद पथरी का आकार डेढ़ एमएम रह गया और दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया।
32 वर्षीय राहुल जैन की 5 एमएम किडनी स्टोन की समस्या भी 90 दिनों में काफी कम हो गई, और वे अपने काम पर लौट गए।
आयुर्वेद में किडनी स्टोन को मूताश्मरी कहा जाता है। यह किडनी, यूरिन ट्रैक और मूत्राशय में पथरी बनने से जुड़ा गंभीर रोग है। सुश्रुत संहिता में इसे “महागद” कहा गया है।
शोध पत्र आयुर्वेद और एकीकृत चिकित्सा विज्ञान जर्नल में प्रकाशित हुआ है। संस्थान ने बड़े पैमाने पर और अधिक मरीजों पर अध्ययन करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। संस्थान के प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला के अनुसार यह शोध साबित करता है कि सही जीवनशैली, आहार और आयुर्वेदिक उपचार से किडनी स्टोन जैसी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
श्वद्रंष्ट्रादि क्वाथ 90 दिनों तक दिन में दो बार लेने से किडनी स्टोन के दर्द और जलन में राहत मिलती है।
पथरी का आकार कम होता है और सर्जरी की आवश्यकता कम हो सकती है।
उचित आहार और गुनगुना पानी आवश्यक है।
यह आयुर्वेदिक इलाज सुरक्षित है और किसी साइड इफेक्ट के बिना प्रभाव दिखाता है।
यह शोध साबित करता है कि कम पानी पीने, गलत जीवनशैली और नियमित देखभाल न करने से बढ़ने वाले किडनी स्टोन का आयुर्वेदिक समाधान भी संभव है।
