September 15, 2026

नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा

0
0000-1776487985

नोएडा।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida and Greater Noida) में हाल के श्रमिक प्रदर्शनों, श्रम कानूनों के उल्लंघन और कंपनियों में बढ़ते असंतोष के बीच प्रशासन ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ श्रम विभाग (Labor Department) ने 24 कंपनियों को मैनपावर सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों को राहत देते हुए 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि का ऐलान किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जांच में प्रदर्शन के पीछे साजिश और बाहरी कनेक्शन के संकेत भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।


203 मैनपावर एजेंसियों पर गाज

श्रम विभाग ने गौतमबुद्ध नगर में श्रम कानूनों का पालन न करने वाली 203 मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ये एजेंसियां 24 कंपनियों में श्रमिक उपलब्ध कराती थीं, लेकिन जांच में सामने आया कि इन्होंने कर्मचारियों को मिलने वाले कई वैधानिक लाभ नहीं दिए।

इन एजेंसियों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और इनके लाइसेंस निरस्त करने के साथ-साथ ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। श्रमिकों के बकाया भुगतान के लिए 1,16,05,067 रुपये का नोटिस भी जारी किया गया है, जबकि अन्य एजेंसियों की पहचान का काम जारी है।
राकेश द्विवेदी, अपर श्रमायुक्त


1 मई से लागू होगी 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि

श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की है। इसके तहत गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी और मई में 7 से 10 तारीख के बीच भुगतान किया जाएगा। यह बढ़ोतरी संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की कटौती ही मान्य होगी, इसके अलावा किसी भी अन्य कटौती पर सख्त कार्रवाई होगी।


सड़कों पर उतरे कर्मचारी

नोएडा के सेक्टर-8 स्थित एक कंपनी के बाहर शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महिला और पुरुष कर्मचारी कंपनी गेट पर इकट्ठा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया।

इसी तरह यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित एक बड़ी मोबाइल निर्माण कंपनी में भी कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज उठाई। शिफ्ट बदलने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र हुए और नारेबाजी की, जिसके बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।


उच्चस्तरीय समिति का दौरा और निरीक्षण

श्रमिकों के आंदोलन को देखते हुए शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की। समिति के सदस्य डॉ. एमकेएस सुन्दरम ने इकोटेक-3 स्थित एक फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां कर्मचारियों को दी जा रही सुविधाओं और स्किल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का जायजा लिया गया। इस दौरान यह भी देखा गया कि किस प्रकार कर्मचारी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।


प्रदर्शन के पीछे साजिश के संकेत, जांच तेज

श्रमिक प्रदर्शनों को लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ा गया था, जिन्हें तमिलनाडु और कर्नाटक से संचालित किया जा रहा था।

इन ग्रुपों के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर श्रमिकों को उकसाया गया। सीसीटीवी फुटेज में 8 से 9 संदिग्ध लोगों को हुलिया बदलकर भीड़ में घुसते हुए देखा गया है। जांच में कुछ मोबाइल नंबर नेपाल से जुड़े पाए गए हैं, जबकि अन्य संदिग्ध कनेक्शनों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि कई आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *