October 5, 2026

BSF जवान की दाढ़ी बनी विवाद की वजह, ट्रिम करने से इनकार के बाद ली स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति; हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

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नई दिल्ली: सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान खुर्शीद अहमद खान की दाढ़ी रखने की अनुमति को लेकर शुरू हुआ विवाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। खान ने 16 जून 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत कमांडेंट, 50 बटालियन BSF, प्रहरिनगर, तुरा, मेघालय ने उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अर्जी स्वीकार कर उन्हें तत्काल प्रभाव से यूनिट की सेवा से हटा दिया था। खान मार्च 1998 में BSF में भर्ती हुए थे। 6 जनवरी 2018 को उन्हें ठीक से कटी-छंटी दाढ़ी रखने की अनुमति दी गई थी, लेकिन शर्त थी कि दाढ़ी साफ-सुथरी और निर्धारित तरीके से ट्रिम रहे। खान का कहना था कि 16 जून 2023 को यह अनुमति अचानक वापस ले ली गई, जिससे परेशान होकर उन्होंने उसी दिन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया।

खान के मुताबिक, उनकी सेवानिवृत्ति की अर्जी उसी दिन स्वीकार कर ली गई। बाद में उन्होंने आवेदन वापस लेने की कोशिश की, लेकिन उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया। 5 जुलाई 2023 के आदेश में उन्हें पेंशन लेने और ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने का निर्देश दिया गया। इसके बाद 19 जुलाई 2024 को BSF महानिदेशक को दी गई उनकी अर्जी पर भी विचार नहीं किया गया। खान ने आरोप लगाया कि दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लेना बदले की भावना से किया गया और उनकी सेवानिवृत्ति वास्तव में स्वैच्छिक नहीं थी। दूसरी ओर, BSF ने कहा कि 2018 में दी गई अनुमति कुछ शर्तों के साथ थी। 16 जून 2023 को खान बिना ट्रिम की हुई लंबी दाढ़ी और खराब हालत में पाए गए, जिसे बल के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताया गया। BSF के अनुसार, खान ने दाढ़ी ट्रिम करने से इनकार किया, जिसके बाद अनुमति वापस ली गई।

BSF ने अदालत को बताया कि खान ने खुद परेड के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की इच्छा जताई थी। कमांडेंट ने अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में उनसे इस बारे में बात की और पूछे जाने पर खान ने किसी दबाव या मजबूरी से इनकार किया था। इस प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी रखा गया था। बल के मुताबिक, खान ने अपनी मां की बीमारी और मेडिकल कैटेगरी के कारण नौकरी की शर्तें पूरी करने में कठिनाई का भी हवाला दिया था। सक्षम अधिकारी ने उनके हालात, सेवा रिकॉर्ड और हाल के व्यवहार पर विचार करने के बाद तीन महीने की नोटिस अवधि में छूट देते हुए तुरा में तत्काल प्रभाव से उनका अनुरोध स्वीकार किया। BSF ने यह भी बताया कि खान के सेवा रिकॉर्ड में 13 प्रतिकूल प्रविष्टियां थीं, जिनमें बिना छुट्टी के अनुपस्थित रहना और नशे में होना शामिल था। वह स्थायी रूप से लो मेडिकल कैटेगरी में भी थे।

हाई कोर्ट ने मामले में दाढ़ी रखने की अनुमति वापस लेने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की वैधता पर सुनवाई नहीं की। अदालत ने BSF की अधिकार क्षेत्र संबंधी शुरुआती आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि खान ने सेवानिवृत्ति की अर्जी तुरा में दी थी और विवादित आदेश भी वहीं जारी हुआ था। यह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। जस्टिस रजनीश ओसवाल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत किसी हाई कोर्ट में रिट याचिका तभी दाखिल की जा सकती है, जब मामले की कार्रवाई का पूरा या कोई महत्वपूर्ण हिस्सा उसके क्षेत्राधिकार में हुआ हो। अदालत को जम्मू-कश्मीर के भीतर ऐसा कोई आधार नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी कहा कि BSF महानिदेशक का कार्यालय नई दिल्ली में होने मात्र से देश का कोई भी हाई कोर्ट मामले की सुनवाई नहीं कर सकता। याचिका शुरुआती चरण में खारिज कर दी गई और खान को संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में जाने की छूट दी गई।

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