June 27, 2026

विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें

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नई दिल्ली । टेनिस की दुनिया में विंबलडन सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट नहीं बल्कि परंपरा प्रतिष्ठा और इतिहास का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। वर्ष 1877 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट ने दुनिया को अनगिनत यादगार मुकाबले और महान खिलाड़ी दिए हैं लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान सेंटर कोर्ट है जिसे विंबलडन का दिल कहा जाता है। यही वह मंच है जहां हर टेनिस खिलाड़ी खेलने और जीत दर्ज करने का सपना देखता है।

सेंटर कोर्ट का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है जितना यहां खेले गए मुकाबलों का। शुरुआती दौर में विंबलडन के कोर्ट अलग-अलग बनाए गए थे लेकिन वर्ष 1881 में दो कोर्ट को मिलाकर एक मुख्य कोर्ट तैयार किया गया जो परिसर के बिल्कुल मध्य में स्थित था। इसी वजह से इसका नाम सेंटर कोर्ट रखा गया। बाद में वर्ष 1922 में जब ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब नए परिसर में स्थानांतरित हुआ तब आधुनिक सेंटर कोर्ट का निर्माण हुआ और तभी से यह विंबलडन की सबसे बड़ी पहचान बन गया।

दिलचस्प बात यह है कि इस कोर्ट का उपयोग पूरे वर्ष में केवल दो सप्ताह के लिए किया जाता है। बाकी समय इसकी घास और सतह की विशेष देखभाल की जाती है ताकि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों को सर्वोत्तम गुणवत्ता का कोर्ट मिल सके। यहां केवल बारहमासी राई घास का इस्तेमाल किया जाता है और उसकी लंबाई करीब 8 मिलीमीटर रखी जाती है जिससे खेल की गति और गुणवत्ता बनी रहती है।

सेंटर कोर्ट की एक और खास पहचान इसका रॉयल बॉक्स है जहां ब्रिटिश शाही परिवार और विशेष अतिथि बैठकर मुकाबलों का आनंद लेते हैं। वर्ष 2009 में यहां आधुनिक रिट्रैक्टेबल रूफ लगाया गया जिससे बारिश के दौरान भी मुकाबले बिना ज्यादा बाधा के जारी रखे जा सकते हैं। महज कुछ मिनटों में छत बंद कर खेल दोबारा शुरू कर दिया जाता है।

इस कोर्ट पर खेलने के लिए खिलाड़ियों को पूरी तरह सफेद पोशाक पहनना अनिवार्य होता है। इसके अलावा कोर्ट के आसपास किसी भी प्रकार के व्यावसायिक विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं दी जाती ताकि विंबलडन की पारंपरिक गरिमा और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे।

सेंटर कोर्ट ने टेनिस इतिहास के कई स्वर्णिम पल देखे हैं। रोजर फेडरर ने अपने आठ विंबलडन खिताब इसी कोर्ट पर जीते। वर्ष 2008 में फेडरर और राफेल नडाल के बीच खेला गया ऐतिहासिक फाइनल आज भी टेनिस इतिहास के सबसे महान मुकाबलों में गिना जाता है। वहीं वर्ष 2019 में नोवाक जोकोविच और फेडरर के बीच खेला गया विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल फाइनल भी इसी कोर्ट का हिस्सा बना।

आज सेंटर कोर्ट केवल एक खेल मैदान नहीं बल्कि उत्कृष्टता परंपरा और गौरव का प्रतीक बन चुका है। यहां जीत हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल माना जाता है। यही वजह है कि जब भी विंबलडन का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले सेंटर कोर्ट की भव्यता और उससे जुड़ी ऐतिहासिक यादें लोगों के सामने उभर आती हैं।

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