September 26, 2026

मैराथन में भारत की ऐतिहासिक वापसी सावन बरवाल ने जीता सिल्वर बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड

0
untitled-1790405733

नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए 26 सितंबर का दिन बेहद खास बन गया। नागोया में भारत के लंबी दूरी के धावक सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। उनके इस प्रदर्शन के साथ एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में भारत का 44 साल लंबा पदक का इंतजार खत्म हो गया। सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर रेस पूरी की। यह उनका पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन होने के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बन गया।

मैराथन के फाइनल में जापान के इचिटाका यामाशिता ने 2 घंटे 10 मिनट 49 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। सावन उनसे 48 सेकंड पीछे रहे। चीन के पेइयू फेंग ने 2 घंटे 12 मिनट 13 सेकंड के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। सावन ने रेस के शुरुआती हिस्से में जिस तरह का प्रदर्शन किया उससे साफ था कि वह पदक की मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।

रेस की शुरुआत से ही सावन ने अपनी गति बनाए रखी। 5 किलोमीटर के पड़ाव पर वह दूसरे स्थान पर थे लेकिन 10 किलोमीटर तक पहुंचते पहुंचते उन्होंने बढ़त हासिल कर ली। 15 किलोमीटर और 20 किलोमीटर के पड़ाव पर भी सावन सबसे आगे बने रहे। हाफ मैराथन यानी 21.1 किलोमीटर की दूरी उन्होंने 1 घंटे 5 मिनट 54 सेकंड में पूरी की और उस समय भी वह रेस में आगे चल रहे थे।

25 किलोमीटर तक सावन की बढ़त कायम रही और उन्होंने 1 घंटे 18 मिनट 19 सेकंड का समय दर्ज किया। इसके बाद जापान के यामाशिता ने रफ्तार बढ़ाई और 30 किलोमीटर के आसपास सावन को पीछे छोड़ दिया। हालांकि भारतीय धावक ने हार नहीं मानी और 35 किलोमीटर के पड़ाव तक फिर से बढ़त हासिल कर ली। रेस के अंतिम हिस्से में मुकाबला बेहद कड़ा रहा लेकिन 40 किलोमीटर के बाद यामाशिता ने निर्णायक बढ़त बना ली। अंत में सावन ने सिल्वर मेडल के साथ रेस पूरी की।

इस पदक का ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भारत ने एशियन गेम्स में इससे पहले पुरुष मैराथन का पदक 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में जीता था। उससे पहले 1951 के एशियन गेम्स में भारत को मैराथन में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल मिले थे। सावन का नागोया सिल्वर भारत के लिए 44 साल बाद इस स्पर्धा में आया पदक है। खास बात यह भी है कि 1982 के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने देश के बाहर आयोजित एशियन गेम्स की मैराथन में पदक जीता है।

सावन के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह इससे पहले राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। इसी साल अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय निकालकर शिवनाथ सिंह के 48 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। शिवनाथ सिंह ने 1978 में 2 घंटे 12 मिनट का रिकॉर्ड बनाया था। अब नागोया में सावन ने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड में और सुधार कर दिया।

भारत के दूसरे धावक कार्तिक करकेरा भी इस फाइनल में उतरे थे। वह 19 धावकों के बीच 17वें स्थान पर रहे। वहीं सावन बरवाल का सिल्वर भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गया है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *