सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत का दमदार पंच, लवलीना सहित 10 मुक्केबाज पहुंचे फाइनल
महिलाओं की 75 किलोग्राम स्पर्धा में ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने एक बार फिर अपने अनुभव और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने तुवालू की प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराते हुए फाइनल में प्रवेश किया। मुकाबले के पहले राउंड से ही लवलीना ने अपने लंबे रीच बेहतरीन फुटवर्क और सटीक पंचों के दम पर विरोधी पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा। उनकी जीत ने भारत की स्वर्ण पदक की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया।
विश्व चैंपियन जैस्मिन लेंबोरिया ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 57 किलोग्राम स्पर्धा में अपनी प्रतिद्वंद्वी को लगातार दबाव में रखा। मुकाबले के दौरान विरोधी खिलाड़ी को कई बार स्टैंडिंग काउंट मिला जिसके बाद रेफरी ने मुकाबला रोकते हुए जैस्मिन को विजेता घोषित कर दिया। उनकी दमदार जीत ने भारतीय टीम का मनोबल और ऊंचा कर दिया।
महिलाओं की 70 किलोग्राम स्पर्धा में अरुंधति चौधरी ने दिन का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए गत चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अपने शानदार पंचों से विरोधी को संभलने का मौका नहीं दिया। इस जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाज अब दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
प्रीति पवार साक्षी और प्रिया घणघस ने भी अपने मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट पक्का किया। इन तीनों खिलाड़ियों ने एकतरफा जीत दर्ज कर यह दिखाया कि भारतीय महिला बॉक्सिंग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है और भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेगी।
पुरुष वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। जादुमणि सिंह सचिन सिवाच अंकुश पंघाल और नरेंद्र बरवाल ने अपने अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई। इन सभी खिलाड़ियों ने तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। खासकर सुपर हैवीवेट वर्ग में नरेंद्र बरवाल की जीत ने दर्शकों को बेहद प्रभावित किया और भारत के लिए एक और संभावित स्वर्ण पदक की उम्मीद जगा दी।
भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश में बॉक्सिंग के लगातार मजबूत होते स्तर का भी प्रमाण है। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया है और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनका दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। यदि फाइनल में भी यही लय बरकरार रही तो भारत के खाते में कई स्वर्ण पदक आ सकते हैं और यह अभियान भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार अभियानों में शामिल हो सकता है।
