April 28, 2026

एक सवाल और बड़ा हंगामा: मनु भाकर के बयान से ज्यादा चर्चा सवाल पूछने के तरीके पर

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नई दिल्ली । देश में खेलों को लेकर जुनून हमेशा से रहा है लेकिन कई बार यही जुनून बहस और विवाद का कारण भी बन जाता है कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर से युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को लेकर सवाल पूछा गया और देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर बड़ी बहस में बदल गया

दरअसल दिल्ली में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम के दौरान मनु भाकर से वैभव सूर्यवंशी के बारे में राय मांगी गई इस पर उन्होंने बेहद संतुलित और सकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि अगर किसी खिलाड़ी को सही मार्गदर्शन और अच्छा माहौल मिले तो उम्र सिर्फ एक नंबर रह जाती है और प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती उन्होंने यह भी कहा कि सही मेंटरशिप के साथ वैभव आगे चलकर बड़ा स्टार बन सकते हैं

हालांकि मनु भाकर का यह बयान प्रेरणादायक था लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र उनका जवाब नहीं बल्कि उनसे पूछा गया सवाल बन गया कई यूजर्स और खेल से जुड़े लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक ओलंपिक मेडलिस्ट शूटर से क्रिकेटर के बारे में सवाल करना उनके खेल और उपलब्धियों के साथ न्याय नहीं है

इस मुद्दे पर जॉय भट्टाचार्य ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मनु भाकर जैसी खिलाड़ी से इस तरह का सवाल पूछना उनके योगदान को कम आंकने जैसा है उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अगर ऐसा ही है तो अगली बार किसी क्रिकेटर से शूटिंग के उभरते खिलाड़ियों पर सवाल पूछा जाना चाहिए

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कभी क्रिकेटरों से अन्य खेलों के खिलाड़ियों के बारे में इस तरह सवाल किए जाते हैं लोगों का मानना है कि क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है जबकि अन्य खेलों के खिलाड़ी भी उतनी ही मेहनत और उपलब्धियां हासिल करते हैं

वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे सामान्य मानते हैं उनका कहना है कि भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है इसलिए अन्य खेलों से जुड़े खिलाड़ियों से भी क्रिकेट पर राय लेना कोई नई बात नहीं है

अगर बात करें वैभव सूर्यवंशी की तो वह इस समय क्रिकेट जगत में तेजी से उभरते सितारे हैं कम उम्र में उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं और Indian Premier League में शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है

यह पूरा विवाद एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है कि क्या भारत में खेलों के बीच संतुलन बन पाया है या नहीं क्या अन्य खेलों को भी क्रिकेट जितनी ही अहमियत मिलनी चाहिए यह बहस लंबे समय से चल रही है और इस घटना ने इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है फिलहाल यह मामला सिर्फ एक सवाल से शुरू हुआ था लेकिन अब यह खेल पत्रकारिता और खेलों के बीच समानता की बड़ी बहस का रूप ले चुका है

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