April 28, 2026

भरोसे से अदालत तक: मस्क ने ओपनएआई पर लगाया विश्वासघात का आरोप, सुनवाई शुरू

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नई दिल्ली । अमेरिका में टेक दुनिया की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में से एक ने अब अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है जहां एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित फेडरल कोर्ट में इस हाई प्रोफाइल केस की सुनवाई शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही पूरी दुनिया की नजरें इस मुकदमे पर टिक गई हैं

इस मामले की अध्यक्षता जज यवोन गोंजालेज रोजर्स कर रही हैं जहां सबसे पहले जूरी चयन की प्रक्रिया शुरू हुई है माना जा रहा है कि यह ट्रायल मई के मध्य तक चल सकता है और इसमें कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं

मामले की जड़ में वह आरोप है जिसमें मस्क ने OpenAI पर अपनी मूल गैर लाभकारी सोच से भटकने का आरोप लगाया है मस्क का कहना है कि जिस संस्था को मानवता के हित में काम करने के लिए बनाया गया था वह अब मुनाफा कमाने वाली कंपनी बन गई है जो उसके शुरुआती उद्देश्य के खिलाफ है

इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब मस्क ने लगभग 134 अरब डॉलर के भारी भरकम हर्जाने की मांग कर दी हालांकि उन्होंने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि यदि उन्हें कोई राशि मिलती है तो वह उसे ओपनएआई की चैरिटेबल शाखा को दान कर देंगे साथ ही मस्क ने ऑल्टमैन और सह संस्थापक ग्रेग ब्रॉकमैन को पद से हटाने की मांग भी की है

दिलचस्प बात यह है कि ट्रायल शुरू होने से ठीक पहले मस्क ने अपने धोखाधड़ी के आरोप वापस ले लिए हैं अब यह मामला मुख्य रूप से विश्वासघात और अनुचित लाभ पर केंद्रित हो गया है वहीं दूसरी ओर ओपनएआई ने मस्क के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह मुकदमा व्यक्तिगत असफलताओं और प्रतिस्पर्धा से उपजी नाराजगी का परिणाम है इस केस में टेक इंडस्ट्री के कई बड़े नाम गवाही दे सकते हैं जिनमें सत्या नडेला का नाम भी शामिल है जिससे यह मुकदमा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है

एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार बचाव पक्ष यह साबित करने की कोशिश करेगा कि मस्क ने पहले खुद ओपनएआई को मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनाने का समर्थन किया था बशर्ते इसे उनकी कंपनी Tesla में शामिल किया जाए मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी दावा किया है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जो सभी को चौंका देंगे

यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच की लड़ाई नहीं बल्कि यह टेक इंडस्ट्री के भविष्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है अब देखना होगा कि अदालत इस बहुचर्चित विवाद में क्या फैसला सुनाती है और इसका असर वैश्विक तकनीकी जगत पर किस रूप में पड़ता है

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