उत्तराखंड में बीजेपी-कांग्रेस के बीच महामुकाबला: न्याय यात्रा vs अराजकता हटाओ मार्च, शुरू हुई सियासी जंग
Lavc57.107.100
-
2027 चुनाव की शुरुआत के पहले से ही सड़कों पर उतरीं दोनों पार्टियां
देवभूमि उत्तराखंड 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। कांग्रेस प्रदेशभर में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ, उत्तराखंड न्याय यात्रा’ निकालकर सरकार को घेर रही है। भाजपा ने इसके जवाब में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्रा शुरू करने की रणनीति बनाई है। दोनों दलों के इन अभियानों के केंद्र में भले ही अलग-अलग मुद्दे हों, लेकिन इनके जरिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जनता के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और संगठन को सक्रिय करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।
कांग्रेस की न्याय यात्रा 22 अक्टूबर से प्रदेश के चार अलग-अलग स्थानों से शुरू हुई। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 22 अक्टूबर को भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान की घोषणा की. भाजपा का यह अभियान 30 नवंबर तक दो चरणों में संचालित किया जाना है। इसके तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों और 70 विधानसभा क्षेत्रों में पदयात्राओं, जनसंवाद और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से जनता तक पहुंचने की योजना है।
राजनीति के के अनुसार, इन दोनों राजनीतिक अभियानों को केवल उत्तराखंड तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली में कांग्रेस की महारैली के पीछे मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और उनके इस्तीफे की मांग के साथ मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाना है. विपक्ष इस रैली की लंबे समय से तैयारी कर रहा है।
ये बात भी समाने आ रही है कि इसके राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए भाजपा ने भी ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के नारे के साथ जवाबी अभियान शुरू किया है। यह रणनीति उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं. उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का राष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. ऐसे में इन राज्यों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई और तेज होती दिखाई दे रही है।
वहीं कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह के अनुसार- बेरोजगारी से जूझ रहे युवा, अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसान और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे इस यात्रा के केंद्र में हैं। हाल ही में रुड़की में हजारों किसानों की ओर से ट्रैक्टरों के साथ प्रदर्शन किया। किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए। अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के नाम सामने आने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं हुई।
साथ ही कहा कि, महिलाओं को न्याय दिलाना, लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना तथा बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करना ही कांग्रेस की न्याय यात्रा का उद्देश्य है।
वहीं, दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता कौस्तुभ जोशी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि., कांग्रेस का इतिहास देश को खंडित करने और बांटने की सोच का रहा है. भाजपा देश को एकजुट और मजबूत बनाने के लिए काम करती है। भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्रा के जरिए पार्टी मंडल से लेकर बूथ स्तर तक अपने संगठन को सक्रिय कर रही है। 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग को पार्टी से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। इसमें पूर्व सैनिकों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच जनसंपर्क बढ़ाया जा रहा है।
उनके मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा उपलब्धियों को बूथ स्तर तक पहुंचाने के साथ विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का जवाब भी जनता के बीच रखा जाएगा।
भाजपा के अभियान की घोषित रूपरेखा के अनुसार, पहले चरण में 31 अक्टूबर को श्रीनगर गढ़वाल में पदयात्रा आयोजित की गई है। इसके बाद 2 नवंबर को देहरादून में बड़ी पदयात्रा और 3 नवंबर को रुद्रपुर में कार्यक्रम प्रस्तावित है। अभियान के दूसरे चरण में भी प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क और पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस अभियान में पदयात्राओं के अलावा विधानसभा स्तर पर संवाद, युवा संवाद, जनसंपर्क कार्यक्रम और अन्य संगठनात्मक गतिविधियां भी शामिल हैं।
जबकि, दूसरी ओर कांग्रेस अपनी न्याय यात्रा के जरिए अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर बेरोजगारी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार, महंगाई, महिला सुरक्षा और अंकिता भंडारी प्रकरण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रही है। ऐसे में उत्तराखंड की राजनीति में दोनों यात्राओं के जरिए दो अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव तैयार किए जा रहे हैं।
