टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन में राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने नई दिल्ली में ग्रहण किया सम्मान
टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों ने गांवों की गलियों में बहने वाले गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए भूमिगत जल निकासी की व्यवस्था विकसित की है। यह पहल चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई थी। वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे अन्य गांवों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की।
पिछले दो वर्षों में यह व्यवस्था जिले के 225 गांवों तक पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन की योजना, तकनीकी मार्गदर्शन और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग से ग्राम पंचायतों में स्थानीय जरूरत के अनुसार भूमिगत जल निकासी व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके चलते गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में गंदा पानी बहने, कीचड़ और जलभराव की समस्या में कमी आई है।
इस मॉडल में घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई के पानी को खुले में बहने से रोकने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए घरों के बाहर सिल्ट चैंबर बनाए जाते हैं। इन चैंबरों को करीब आठ इंच व्यास वाले पाइपों से जोड़ा जाता है। पाइपलाइन के माध्यम से पानी को भूमिगत तरीके से गांव के अंतिम बिंदु तक पहुंचाया जाता है, जहां सोख्ता गड्ढे के जरिए पानी का निस्तारण किया जाता है।
सिल्ट चैंबर में गाद और ठोस पदार्थों को रोकने की व्यवस्था रहती है। इससे भूमिगत पाइपों में रुकावट की संभावना कम होती है और पानी की निकासी सुचारु बनी रहती है। व्यवस्था का असर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजमर्रा के जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। गलियों में गंदे पानी और कीचड़ की समस्या कम होने से लोगों का आवागमन आसान हुआ है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी रास्ते अधिक सुविधाजनक हुए हैं।
इस पूरी व्यवस्था के विकास में ग्राम पंचायतों के स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के साथ पंचम वित्त आयोग से मिले वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया गया। चैंबर, भूमिगत पाइपलाइन और सोख्ता गड्ढों का निर्माण स्थानीय परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार किया गया है।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने पुरस्कार को जिले की ग्राम पंचायतों के संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रपुरा से शुरू हुई पहल अब 225 गांवों तक पहुंच गई है। उनके अनुसार यह केवल भूमिगत जल निकासी तैयार करने का काम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता और गांवों के परिवेश में बदलाव लाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस मॉडल को और प्रभावी बनाने के साथ इसके संचालन और रखरखाव पर भी लगातार ध्यान देगा। एक गांव से शुरू होकर 225 गांवों तक पहुंची यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे वॉटर प्रबंधन के लिए स्थानीय समाधान और योजनाबद्ध प्रयास के उदाहरण के रूप में सामने आई है।
