माकपा ने मध्यप्रदेश सरकार से सरसों और तुअर की एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की
जसविंदर सिंह ने कहा कि सोयाबीन की भावांतर योजना में पहले ही सरकार ने किसान विरोधी रवैया अपनाया है और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं दिलाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरसों और तुअर की खरीद एमएसपी पर नहीं की गई तो इससे किसान गंभीर आर्थिक नुकसान उठाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना केवल किसानों की समस्याओं को छुपाने और उनके अधिकारों को नजरअंदाज करने का माध्यम बन चुकी है।
माकपा के अनुसार एमएसपी पर खरीदी न होने से किसान बाजार में अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं पा रहे हैं जिससे उनकी आमदनी घट रही है और कर्ज में फंसने की समस्या बढ़ रही है। जसविंदर सिंह ने सरकार से अपील की कि किसानों के उत्पाद की उचित कीमत सुनिश्चित करना और उनकी आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरसों और तुअर की एमएसपी पर खरीदी से किसानों को राहत मिलेगी और कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनेगी।
माकपा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों को नजरअंदाज किया तो वह सड़क से लेकर अन्य जन माध्यमों तक आंदोलन करने और किसानों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सरकारी नीतियों की उपेक्षा और भावांतर जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को उनके हक से वंचित करना स्वीकार्य नहीं है।
जसविंदर सिंह ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं खासकर दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए। उनका कहना था कि सरकार को तुरंत कदम उठाने होंगे और एमएसपी पर खरीदी की गारंटी देनी होगी ताकि किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो और उनका आर्थिक नुकसान न हो।
माकपा का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में खरीफ फसलों की कटाई चल रही है और किसान अपने उत्पाद को लेकर चिंतित हैं। पार्टी का यह भी कहना है कि यदि एमएसपी पर खरीदी नहीं की गई तो इससे बाजार में फसलों की कीमतें गिर सकती हैं और किसानों को उनके उत्पादन का पूरा लाभ नहीं मिलेगा। जसविंदर सिंह ने निष्कर्ष में कहा कि सरकार को किसान विरोधी नीतियों को बदलकर उनके हित में काम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि माकपा हर स्तर पर किसानों के समर्थन में खड़ी रहेगी और उनकी मांगों को मजबूती से उठाएगी।
