शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में संयम जरूरी, रिटेल निवेशकों को सेबी प्रमुख की सलाह
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और बढ़ोतरी के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि जैसे-जैसे बाजार का विस्तार और संकुचन बढ़ता है, वैसे-वैसे वैश्विक घटनाओं का प्रभाव भी अधिक देखने को मिलता है। पांडे ने मवेशियों को सलाह दी कि बाजार के छोटे समय के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय दीर्घकालिक नजरिया अपनाना अधिक फायदेमंद साबित होता है।
धैर्य ही रिटेल इंजीनियरों की सबसे बड़ी रणनीति
सेबी प्रमुख ने कहा कि रिटेल इंजीनियरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीति धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि इतिहास गवाह है कि बड़े वैश्विक संकटों के बाद भी शेयर बाजारों ने समय के साथ वापसी की है और भारतीयों को अच्छा रिटर्न दिया है।
उनका कहना था कि बाजार में अस्थिरता के दौर अक्सर अस्थायी होते हैं और लंबे समय में मजबूत आर्थिक आधार वाले देशों के बाजार फिर से स्थिर हो जाते हैं। इसलिए भारतीयों को घबराकर अपने निवेश से बाहर निकलने के बजाय समझदारी और संयम के साथ फैसला लेना चाहिए।
भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट का असर
पांडे ने स्वीकार किया कि मौजूदा समय में वैश्विक बाजार कई तरह की जबड़े का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और ऊर्जा संकट जैसे कारक वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं को बढ़ा रहे हैं।
विशेष रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज के वित्तीय बाजारों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि उनमें अस्थिरता पहले की तुलना में अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सूचना और खबरें बेहद तेजी से फैलती हैं।
तकनीक से तेजी से बदल रहा बाजार
सेबी प्रमुख के अनुसार आधुनिक वित्तीय बाजार तकनीक के कारण पहले से कहीं ज्यादा तेज और जटिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि संस्थागत ट्रेडिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों के कारण बाजार की गतिविधियां बहुत तेजी से होती हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज के दौर में खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं और बेटियों की राय उससे भी तेज बनती है। यही कारण है कि कई बार बाजार वास्तविक आर्थिक आयामों के बजाय खबरों या धारणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं।
स्थिरता बनाए रखना नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी
सेबी प्रमुख ने कहा कि बाजार की तेजी के साथ उनकी स्थिरता बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि नियामक संस्थाओं और नीति निर्माताओं का दायित्व है कि वे बेटियों के हितों की रक्षा करते हुए बाजार में भरोसा और भरोसा बनाए रखें। उन्होंने बताया कि भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण के लिए मजबूत बॉन्ड बाजार, बेटियों की बढ़ती भागीदारी और तकनीकी नवाचार बहुत अहम होंगे।
बेटियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम
निवेशकों की सुरक्षा को लेकर सेबी कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसमें सोशल मीडिया पर फैलाने वाली बातचीत या फर्जी निवेश सलाह की निगरानी को मजबूत करना भी शामिल है। इसके अलावा नियामक संस्था अपनी निगरानी तंत्र को भी लगातार उन्नत कर रही है, ताकि बाजार में संभावित हेरफेर, अंदरूनी ट्रेडिंग या गलत जानकारी के प्रसार को समय पर रोका जा सके।
विशेष रूप से सेबी अपनी उन्नत निगरानी प्रणाली PARRVA निगरानी प्रणाली को मजबूत कर रहा है, जिससे बाजार में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों का जल्दी पता लगाया जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे पैदल चलने वालों से इंजीनियरों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय पूंजी बाजार भविष्य में और अधिक मजबूत बन सकेगा।
