सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की थाली से पूजा के फूलों तक का रोडमैप तैयार, 15 जिलों से उज्जैन पहुंचेगी उपज, सप्लाई चेन पर रहेगा फोकस
सिंहस्थ करीब 60 दिनों तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही रहेगी और भोजन की व्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में सब्जियों की जरूरत पड़ेगी। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 66 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही हो सकती है। यदि प्रति व्यक्ति रोजाना दो किलोग्राम सब्जी की जरूरत का मानक माना जाए तो संभावित मांग लगभग 13 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। हालांकि यह एक अनुमानित गणना है। वास्तविक खपत श्रद्धालुओं के ठहरने की अवधि भोजन व्यवस्था और सब्जियों के वास्तविक इस्तेमाल पर निर्भर करेगी। इतनी बड़ी संभावित जरूरत को देखते हुए विभाग का जोर स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और दूसरे जिलों से नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।
योजना के तहत करीब 16 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त उत्पादन का प्रस्ताव है। इसमें आठ हजार हेक्टेयर में सब्जियां और आठ हजार हेक्टेयर में फूलों की खेती विकसित करने की तैयारी की जा रही है। क्लस्टर आधारित मॉडल में एक क्षेत्र के कई किसान मांग के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से फसल उगाएंगे। इससे विभाग को पहले से जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले और क्षेत्र में कौन सी फसल कितने रकबे में लगाई जा रही है और उससे कितनी उपज मिलने की संभावना है। इस तरह आयोजन के समय अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन और आपूर्ति की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।
सब्जियों के उत्पादन के लिए उज्जैन संभाग के उज्जैन आगर-मालवा शाजापुर देवास रतलाम नीमच और मंदसौर जिलों को प्रस्तावित क्लस्टर योजना में शामिल किया गया है। इन जिलों में हाइब्रिड सब्जियों का अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को खेती की तकनीक और फसल चयन के संबंध में प्रशिक्षण देने की तैयारी है। जरूरत के मुताबिक अलग-अलग क्षेत्रों में आलू प्याज टमाटर और हरी सब्जियों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यदि किसी एक क्षेत्र में फसल खराब होती है तो दूसरे जिलों से आपूर्ति बढ़ाकर कमी को पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
सिंहस्थ में पूजा और धार्मिक गतिविधियों के कारण फूलों की मांग भी काफी बढ़ने की संभावना है। इसके लिए उज्जैन इंदौर देवास आगर-मालवा खंडवा छतरपुर मैहर और दतिया में फूलों के उत्पादन क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। उज्जैन में करीब 4200 हेक्टेयर में गेंदा उत्पादन के लिए 25 क्लस्टर और 240 गांवों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा गुलाब की खेती का रकबा बढ़ाकर 250 हेक्टेयर से अधिक करने की तैयारी है। फूलों की आधुनिक खेती और बेहतर पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन में करीब 19 एकड़ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्लोरीकल्चर विकसित करने की योजना भी है।
हालांकि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। खेत से निकली सब्जियों को समय पर उज्जैन तक पहुंचाने के लिए संग्रहण केंद्र ग्रेडिंग पैकिंग और जरूरत के अनुसार कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था भी जरूरी होगी। सब्जियां जल्दी खराब होती हैं इसलिए परिवहन में देरी होने पर उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विभाग को मांग और उपलब्धता का रिकॉर्ड तैयार कर आपूर्ति की निगरानी भी करनी होगी। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस जिले से कितनी सब्जियां भेजनी हैं और किस क्षेत्र में उनकी जरूरत अधिक है।
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केएस मंडलाई के मुताबिक सिंहस्थ में सब्जियों और फूलों की मांग बढ़ने को देखते हुए दो साल पहले से तैयारी की जा रही है। किसानों को चिह्नित कर प्रशिक्षण देने और विशेष क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। अब इस योजना की सफलता उत्पादन बढ़ाने के साथ परिवहन भंडारण और वितरण के बीच तालमेल पर निर्भर करेगी। यदि पूरी व्यवस्था समय पर तैयार हो जाती है तो सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की जरूरत पूरी करने के साथ किसानों को भी अपनी उपज के लिए बड़ा बाजार मिल सकता है।
