85 वर्षीय किसान की जमीन पर फर्जी अनुबंध का आरोप: कोर्ट के आदेश पर FIR, दस्तावेजों की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में शिवपुरी के किड्स गार्डन स्कूल के पास रहने वाले शिवकुमार गौतम को आरोपी बनाया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 336(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले ने शहर में जमीन संबंधी विवादों और दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
शिकायतकर्ता रामजीलाल वर्मा के अनुसार, उनके नाम राजस्व अभिलेखों में सर्वे नंबर 609/2 की भूमि दर्ज है और वे इसके वैध स्वामी हैं। आरोप है कि फरवरी 2024 में शिवकुमार गौतम ने इस भूमि को अपनी बताते हुए हेमंत कुमार गुप्ता के साथ अनुबंध कर लिया। शिकायत में दावा किया गया है कि यह अनुबंध पूरी तरह फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया था।
रामजीलाल वर्मा का कहना है कि इस कथित अनुबंध का उद्देश्य उनकी संपत्ति पर अवैध दावा स्थापित करना और आर्थिक लाभ प्राप्त करना था। जब उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
बताया गया है कि रामजीलाल वर्मा ने पहले फिजिकल थाना, कोतवाली थाना और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्याय की उम्मीद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और परिवाद प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का अवलोकन किया। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत कोतवाली थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने विधिवत मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कोतवाली थाना पुलिस अब कथित अनुबंध से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि अनुबंध किन परिस्थितियों में तैयार किया गया, उसमें प्रयुक्त दस्तावेजों की वैधता क्या है और कहीं किसी प्रकार की जालसाजी या कूटरचना तो नहीं की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच प्रारंभिक चरण में है और पुलिस दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि भूमि संबंधी मामलों में दस्तावेजों की पारदर्शिता और सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और इस पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका रही।
