अब तेजी से होगी 50 लाख हितग्राहियों की रजिस्ट्री एक अधिकारी को रोज 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य
स्वामित्व योजना के तहत पहले करीब 48.80 लाख हितग्राहियों का चयन किया गया था लेकिन अब यह संख्या 50 लाख से अधिक हो गई है। प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले ही इन हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री की सुविधा देने के फैसले को मंजूरी दी थी। अब इसके क्रियान्वयन की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से आबादी की जमीन पर रह रहे लोगों को उनके घर और जमीन का वैध मालिकाना हक उपलब्ध कराना है।
रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक के साथ पंचायत समन्वय अधिकारी तथा सहायक विकास विस्तार अधिकारी को भी सब रजिस्ट्रार के अधिकार दे दिए हैं। नए नोटिफिकेशन के मुताबिक राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत उप पंजीयक की शक्तियां दी गई हैं। वे अपने निर्धारित जिले और क्षेत्र में स्वामित्व योजना के पात्र हितग्राहियों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कर सकेंगे।
इसी तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास विस्तार अधिकारी को उनके पदस्थ जिले के जनपद क्षेत्र में उप पंजीयक के रूप में रजिस्ट्री करने का अधिकार दिया गया है। इससे अलग अलग क्षेत्रों में एक साथ रजिस्ट्री का काम शुरू किया जा सकेगा और लोगों को रजिस्ट्री के लिए लंबी प्रक्रिया या इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने रजिस्ट्री की रफ्तार बढ़ाने के लिए अधिकारियों के सामने लक्ष्य भी तय किया है। अधिकार प्राप्त प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को रोजाना कम से कम 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य दिया गया है। रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी का नाम दर्ज रहेगा। इससे बड़ी संख्या में हितग्राहियों की रजिस्ट्री कम समय में पूरी करने की योजना है।
इससे पहले प्रदेश के सभी तहसीलदारों को भी स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के लिए सब रजिस्ट्रार के अधिकार दिए जा चुके हैं। अब राजस्व और पंचायत विभाग के अन्य अधिकारियों को अधिकार मिलने से रजिस्ट्री कराने वाले अधिकारियों का दायरा और बढ़ गया है।
हालांकि योजना के इस प्रावधान को लेकर पटवारियों में नाराजगी भी है। प्रदेश के पटवारी इस बात का विरोध कर रहे हैं कि रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के तौर पर उनका नाम दर्ज किया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में रजिस्ट्री से संबंधित कोई कानूनी विवाद सामने आता है तो उनके बचाव की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उन्हें अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया में उलझना पड़ सकता है। सरकार के सामने अब एक ओर जहां लाखों लोगों को जल्द मालिकाना हक देने की चुनौती है वहीं दूसरी ओर रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की आशंकाओं का समाधान करना भी अहम होगा।
