करैरा में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा, शहर काजी पर हमला होने से लोगों में दहशत..
जानकारी के अनुसार, शहर काजी मंजरे आलम अपने घर के आंगन में बैठे थे। इसी दौरान पीछे से आए बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों ने उनके शरीर के कई हिस्सों में काटकर उन्हें घायल कर दिया। घर के आंगन में हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों का कहना है कि जब लोग अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, तो सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, करैरा में लगभग 20 से 25 बंदरों का झुंड अलग-अलग इलाकों में घूमता रहता है। ये बंदर सुबह और शाम के समय गलियों तथा घरों की छतों पर अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं। लोगों की शिकायत है कि बंदर सामान उठाकर फेंक देते हैं, महिलाओं के हाथों से थैलियां छीन लेते हैं और बच्चों के पीछे दौड़ते हैं। इस वजह से परिवारों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।
बंदरों के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। नगर की कई गलियों और सड़कों पर कुत्तों के झुंड दिखाई देने से राहगीरों में डर बना रहता है। बच्चों को अकेले स्कूल भेजने में अभिभावक संकोच कर रहे हैं, जबकि बुजुर्गों को मंदिरों और पार्कों तक जाने में परेशानी हो रही है। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, शाम के समय महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
पिछले कुछ दिनों में कुत्तों के काटने की कई घटनाएं सामने आने की बात भी कही गई है। समस्या तब और बढ़ जाती है, जब पीड़ितों को इलाज के लिए जरूरी एंटी रेबीज इंजेक्शन स्थानीय अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने की शिकायत मिलती है। ऐसी स्थिति में लोगों को उपचार के लिए शिवपुरी जाना पड़ता है। कुत्ते के काटने के बाद समय पर चिकित्सा और रेबीज से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी होता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर उपचार की उपलब्धता भी नागरिकों की प्रमुख चिंता है।
नागरिकों का आरोप है कि बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर परिषद और सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस कार्रवाई के बजाय आश्वासन ही मिले हैं। लोगों का कहना है कि समस्या लगातार बनी रहने से बच्चों, बुजुर्गों और अन्य राहगीरों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उचित स्थान पर पहुंचाने के लिए वन विभाग की टीम की मदद ली जाए तथा जरूरत के अनुसार पिंजरे लगाए जाएं। आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नसबंदी और टीकाकरण अभियान भी शुरू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कुत्तों के काटने के मामलों को देखते हुए अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अब नगरवासियों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग समस्या के समाधान के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं।
