मध्य प्रदेश में वित्तीय गड़बड़ियों पर बड़ी कार्रवाई, 392 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में, सात बर्खास्त
विभाग के अनुसार, नगरीय निकायों में सामने आई वित्तीय गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कदम उठाए गए हैं। जांच में अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से वसूली के साथ वेतन वृद्धि रोकने, पदावनति और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई की गई है। कार्रवाई का स्वरूप मामले की गंभीरता और जिम्मेदारी के स्तर के आधार पर तय किया गया।
अधिकारियों के अलावा गलत दरों पर सामान उपलब्ध कराने वाले 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कदम उठाए गए हैं। विभाग का कहना है कि सरकारी खरीद और खर्च में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अनियमितताओं पर निगरानी की जा रही है। वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने पर जोर दिया जा रहा है।
नगरीय प्रशासन विभाग निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का भी इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करना, सरकारी खर्च पर नजर रखना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ाना है। तकनीक की मदद से विभाग सरकारी संसाधनों के उपयोग की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
विभाग के मुताबिक, सरकारी धन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से होना और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचना प्राथमिकता है। नगरीय निकाय नागरिकों को स्थानीय स्तर पर कई जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन में अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का असर सरकारी कामकाज तथा नागरिक सुविधाओं पर पड़ सकता है। इसी कारण विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।
मध्य प्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। विभाग का कहना है कि नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने, जनसमस्याओं का समय पर समाधान करने और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
संजय दुबे के अनुसार, नगरीय निकायों में वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग का लक्ष्य सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब तक की कार्रवाई में 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं, सात लोगों को बर्खास्त किया गया है और संबंधित मामलों में करोड़ों रुपये की वसूली की गई है।
