एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक
यदि विधानसभा से यह विधेयक पारित हो जाता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है तो मध्य प्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और सरकार इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा जहां इस पर विस्तार से चर्चा होगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सदन की मंजूरी मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
कैबिनेट बैठक भोपाल के समीप जगदीशपुर स्थित ऐतिहासिक चमन महल में आयोजित की गई जहां जनजातीय संस्कृति और विरासत को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। बैठक स्थल पर जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुति दी जबकि सभागार में जनजातीय वीर नायकों के चित्र लगाए गए थे। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इलेक्ट्रिक बसों से बैठक स्थल पहुंचे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राजा भोज परमार राजवंश और गोंड शासकों की समृद्ध विरासत का केंद्र रहा है। उन्होंने रानी कमलापति के साहस और त्याग को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने भोपाल के ऐतिहासिक विकास में विभिन्न शासकों और संस्कृतियों के योगदान का भी उल्लेख किया।
देश में समान नागरिक संहिता को लेकर पहले भी कई राज्यों ने पहल की है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना जहां विधेयक पारित होने के बाद जनवरी 2025 से इसे लागू किया गया। इसके बाद गुजरात विधानसभा ने भी यूसीसी विधेयक पारित किया। वहीं असम विधानसभा ने भी समान नागरिक संहिता संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है हालांकि वहां कुछ अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। गोवा में लंबे समय से पुर्तगाली सिविल कोड के तहत समान नागरिक कानून की व्यवस्था लागू है।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां यूसीसी विधेयक पर चर्चा होगी। सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है जबकि इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना भी है।
