June 2, 2026

मोहन सरकार का ट्रांसफर अभियान शुरू, कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादलों पर तेज हुई कवायद

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मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद तबादलों का दौर आखिरकार शुरू हो गया है। राज्य सरकार की नई तबादला नीति लागू होने के साथ ही एक जून से 15 जून तक कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थानांतरण किए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित अवधि के भीतर ही सभी विभागों को स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद जारी होने वाले आदेश अमान्य माने जाएंगे। ऐसे में विभिन्न विभागों में तैयारियां तेज हो गई हैं और प्रशासनिक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं।

डॉ. मोहन यादव सरकार की कैबिनेट ने हाल ही में तबादला नीति-2026 को मंजूरी दी थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक तौर पर नई नीति जारी कर सभी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए। नौ दिनों की तैयारी अवधि के बाद अब विभागों को स्थानांतरण आदेश जारी करने की अनुमति मिल गई है। इसी के साथ प्रदेशभर में कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच तबादलों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

पुलिस मुख्यालय ने भी इस संबंध में सक्रियता दिखाई है। पीएचक्यू ने पांच जून तक आरक्षक से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के पुलिसकर्मियों के तबादले करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों ने अपने स्तर पर तबादला प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और अन्य कई विभागों ने जिलों में पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों की विस्तृत जानकारी मंगाना शुरू कर दिया है।

नई नीति के तहत कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादलों की सीमा तय की गई है। जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं वहां 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। 200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में 15 प्रतिशत, 1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में 10 प्रतिशत और 2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में पांच प्रतिशत तक तबादलों की अनुमति दी गई है।

सरकार ने कुछ मामलों को तबादला नीति से बाहर रखा है। पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने और गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों में होने वाले स्थानांतरण सामान्य सीमा में नहीं गिने जाएंगे। इसके अलावा स्वयं के खर्च पर और पारस्परिक तबादलों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई गई है।

नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को एक जिले में तीन वर्ष पूरा होने पर जिले से बाहर भेजा जा सकता है। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के लिए भी यही नियम लागू होगा। हालांकि तीन वर्ष की अवधि को अनिवार्य शर्त नहीं माना गया है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है तो उसका तबादला तय समय से पहले भी किया जा सकता है।

महिला कर्मचारियों को विशेष राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान रखा गया है। वहीं जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष है उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा।

सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि स्थानांतरण आदेश केवल ऑनलाइन जारी किए जाएं। आदेशों में कर्मचारी का ट्रेजरी एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। 15 जून के बाद जारी किसी भी तबादला आदेश को शून्य माना जाएगा और उसका पालन नहीं किया जाएगा। साथ ही स्थानांतरण के बाद पुराने पदस्थापना स्थल से वेतन आहरण करने पर वित्तीय अनियमितता मानी जाएगी।

नई तबादला नीति का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। अब अगले दो सप्ताह तक प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर तबादलों की गतिविधियां देखने को मिलेंगी, जिसका असर विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर भी नजर आएगा।

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