कवच योजना बनी किसानों की नई उम्मीद, डिफॉल्टर किसानों को फिर मिलेगा खेती का सहारा
जानकारी के अनुसार प्रदेश में ऐसे करीब पांच हजार किसान हैं जिन्होंने सहकारी बैंकों और समितियों में अपनी बकाया राशि जमा कर दी थी लेकिन कुछ बैंक प्रबंधकों और कर्मचारियों ने वह राशि बैंक में जमा करने के बजाय उसका गबन कर लिया। किसानों ने भरोसे के आधार पर बिना रसीद के पैसा जमा कराया था क्योंकि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बाद में आधिकारिक रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बैंक रिकॉर्ड में राशि जमा नहीं होने के कारण किसान डिफॉल्टर घोषित हो गए।
डिफॉल्टर घोषित होने का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को यह हुआ कि वे दोबारा सहकारी बैंकों से कृषि ऋण लेने के पात्र नहीं रहे। इसके साथ ही उन्हें खाद बीज और अन्य कृषि सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ा। इससे उनकी खेती प्रभावित हुई और आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती चली गई। कई किसानों ने लगातार इस समस्या को सरकार के सामने उठाया जिसके बाद सहकारिता विभाग ने समाधान के लिए कवच योजना तैयार की।
योजना के तहत ऐसे किसानों पर दर्ज बकाया राशि का भार राज्य सरकार और अपेक्स बैंक मिलकर वहन करेंगे ताकि किसानों के नाम से डिफॉल्टर का रिकॉर्ड हटाया जा सके। इसके बाद प्रभावित किसान फिर से सहकारी बैंकों से ऋण ले सकेंगे और खाद बीज सहित अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ भी उठा पाएंगे। सरकार का मानना है कि किसानों की गलती न होने के बावजूद उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए इसलिए यह योजना उनके हितों की रक्षा के लिए लाई जा रही है।
सहकारिता विभाग के अनुसार जिन बैंक प्रबंधकों और समिति कर्मचारियों पर गबन के आरोप सिद्ध हुए हैं उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। कई मामलों में राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है। हालांकि जब तक पूरा पैसा वापस नहीं आता तब तक किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने यह अंतरिम व्यवस्था तैयार की है ताकि उनकी खेती और आजीविका प्रभावित न हो।
आज होने वाली कैबिनेट बैठक में इस योजना के अलावा विभिन्न विभागों की कई योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा होगी। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू किया जाएगा जिसमें मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर योजनाओं की निगरानी और जनता से सीधा संवाद करने के निर्देश दिए जाएंगे।
कवच योजना को किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि इससे उन लोगों को नई उम्मीद मिलेगी जो वर्षों से बिना किसी गलती के बैंकिंग व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे थे। सरकार का यह कदम न केवल किसानों का भरोसा बहाल करेगा बल्कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
