March 8, 2026

खरगोन: टंट्या मामा मूर्ति विवाद में बड़ी गाज, दो इंजीनियर निलंबित; भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनों ने ही खोला मोर्चा

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खरगोन । क्रांतिकारी आदिवासी नायक जननायक टंट्या मामा भील की मूर्ति स्थापना को लेकर उपजा विवाद अब शासन की कड़ी कार्रवाई और राजनीतिक घमासान में तब्दील हो चुका है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए खरगोन नगरपालिका में पदस्थ दो इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बिस्टान नाका चौराहे पर स्थापित की गई मूर्ति में बरती गई भारी अनियमितताओं और लापरवाही के चलते की गई है।

शासन की सख्त कार्रवाई

नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जारी आदेश के तहत सहायक यंत्री मनीष महाजन और उपयंत्री जितेन्द्र मेढ़ा को निलंबित किया गया है। विभाग ने माना है कि मूर्ति स्थापना की प्रक्रिया में इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर चूक की और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया।

क्या है पूरा विवाद करोड़ों की मंजूरी, कौड़ियों की मूर्ति

विवाद की जड़ मूर्ति के निर्माण में हुआ कथित भ्रष्टाचार है। नगरपालिका की प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल PIC ने टंट्या मामा की भव्य कांस्य या पत्थर की मूर्ति के लिए 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी। लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से महज 75 हजार से 1 लाख रुपये की सस्ती की मूर्ति स्थापित कर दी। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, आदिवासी समाज और राजनीतिक गलियारों में आक्रोश फैल गया।

भाजपा पार्षदों का सद्बुद्धि यज्ञ और मोर्चा

हैरान करने वाली बात यह है कि खरगोन नगरपालिका में भाजपा का ही परिषद अध्यक्ष छाया जोशी है, लेकिन अब भाजपा पार्षदों ने ही अपनी ही परिषद के अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रोलिंग का डर भाजपा पार्षदों का कहना है कि इस भ्रष्टाचार के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है। विरोध का तरीका: पार्षद भागीरथ बड़ोले के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने गांधी प्रतिमा पर ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ किया और अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर FIR दर्ज करने की मांग की।

कांग्रेस का अल्टीमेटम और चक्का जाम की चेतावनी

कांग्रेस इस मुद्दे पर और अधिक हमलावर हो गई है। जिला अध्यक्ष रवि नायक ने इसे आदिवासी अस्मिता का अपमान बताते हुए प्रशासन के 45 दिनों के आश्वासन को ठुकरा दिया है। उन्होंने 26 जनवरी 2026 से 60 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में भव्य धातु की मूर्ति स्थापित नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।

अब आगे क्या

नगरपालिका ने अपनी गलती सुधारने के प्रयास शुरू कर दिए हैं नया टेंडर 19 जनवरी 2026 को धातु की नई मूर्ति के लिए ई-टेंडर जारी किया गया है। समय सीमा 2 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर 45 दिनों के भीतर नई मूर्ति स्थापित करने का दावा किया गया है।

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