वोट बचाओ रैली में MP से एक लाख लोगों को ले जाने का लक्ष्य, कांग्रेस नेताओं से तैयारियों का हिसाब मांग रहे पटवारी
कांग्रेस की योजना के मुताबिक प्रदेश के अलग अलग जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों को जिलेवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जीतू पटवारी समीक्षा के दौरान यह पूछ रहे हैं कि किस जिले से कितने लोग दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं और अब तक कितनी बसें तथा चार पहिया वाहन बुक किए जा चुके हैं। इसके अलावा रेलवे में कितने टिकट आरक्षित कराए गए हैं और यात्रा करने वालों की सूची कितनी तैयार हुई है इसकी भी जानकारी मांगी जा रही है। पार्टी का जोर समय रहते परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करने पर है।
ग्वालियर चंबल संभाग में रैली की तैयारियों को लेकर विशेष लक्ष्य तय किया गया है। यहां जिला अध्यक्षों विधायकों पूर्व विधायकों विधानसभा प्रभारियों और जिला प्रभारियों को दो दो हजार लोगों को दिल्ली ले जाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में संबंधित पदाधिकारियों को एक एक हजार लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है। समीक्षा बैठकों में इन निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले अब तक हुई तैयारियों का आकलन किया जा रहा है। पदाधिकारियों से यह भी पूछा जा रहा है कि वे अपने क्षेत्र में लोगों से संपर्क कर रहे हैं या नहीं और यात्रा की व्यवस्था किस स्तर तक पहुंची है।
दिल्ली महारैली की तैयारियों के साथ प्रदेश कांग्रेस संगठन के कामकाज की समीक्षा भी की जा रही है। जीतू पटवारी विधानसभा प्रभारियों से उनके क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तृत ब्योरा मांग रहे हैं। इसमें बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए दो के गठन और उनके भौतिक सत्यापन की स्थिति प्रमुख है। इसके साथ ही मंडलम के गठन और सत्यापन तथा वार्ड और पंचायत समितियों के गठन से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। पार्टी यह देखना चाहती है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए निर्धारित काम कितनी प्रगति पर हैं।
विधानसभा प्रभारियों से यह भी पूछा जा रहा है कि उन्होंने अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र का कितनी बार दौरा किया और हर महीने कितने दिन वहां प्रवास किया। इन जानकारियों के जरिए संगठन की वास्तविक स्थिति और स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की सक्रियता का आकलन किया जा रहा है। पार्टी की रणनीति में बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस की इन बैठकों में अब दो मोर्चों पर जवाबदेही तय होती दिखाई दे रही है। एक तरफ दिल्ली की महारैली में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परिवहन और यात्रियों की व्यवस्था पर जोर है तो दूसरी तरफ संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के काम की समीक्षा की जा रही है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लोगों को दिल्ली पहुंचाना और संगठन की गतिविधियों को जमीन पर आगे बढ़ाना जिला तथा विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों के लिए अहम जिम्मेदारी बन गई है।
एक नवंबर को होने वाली महारैली में मध्यप्रदेश से वास्तविक भागीदारी कितनी रहती है यह आयोजन के दिन स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि तैयारियों में कोई कमी न रहे और जिलेवार जिम्मेदारियों के अनुसार परिवहन तथा संगठन से जुड़े काम समय पर पूरे कर लिए जाएं।
