GBS से जंग जीतकर लौटी थीं पार्वती, डॉक्टरों ने दी थी 3 से 4 फीसदी उम्मीद, 7 महीने बाद जिंदगी ने साथ छोड़ा
पार्वती के बेटे नीलेश के मुताबिक उनकी मां की तबीयत अगस्त में दोबारा बिगड़ने लगी थी। इसके बाद 17 अगस्त से उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिवार लगातार उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद कर रहा था लेकिन बुधवार रात उनकी मौत हो गई। इससे परिवार को बड़ा झटका लगा है क्योंकि कुछ महीने पहले ही पार्वती ने बेहद गंभीर स्थिति से बाहर निकलकर जिंदगी की जंग जीती थी।
पार्वती की तबीयत दिसंबर 2025 में उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद बिगड़ी थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन हालत गंभीर होने पर अलग अलग अस्पतालों में इलाज के बाद बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। जांच में GBS की पुष्टि हुई। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करने लगती है। इसके कारण शरीर में कमजोरी बढ़ सकती है और गंभीर मामलों में मरीज के लिए चलना फिरना और सांस लेना भी मुश्किल हो सकता है।
पार्वती की हालत बेहद गंभीर होने के कारण उन्हें 16 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया था जबकि 22 दिन ICU में इलाज चला। फेफड़ों की स्थिति खराब होने पर ट्रेकोस्टोमी भी की गई थी। वे करीब 18 दिन तक बेहोश रहीं। लंबे इलाज के बाद मार्च में उनकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार शुरू हुआ। वे परिजनों को पहचानने लगी थीं और जवाब देने का प्रयास भी करने लगी थीं। 9 मार्च को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था।
घर लौटने के बाद भी पार्वती की पूरी तरह रिकवरी के लिए लगातार देखभाल की जरूरत थी। परिवार उन्हें नली के जरिए दिन में कई बार लिक्विड डाइट और प्रोटीन देता था। फिजियोथेरेपी और दवाओं के साथ उनकी देखभाल जारी थी। परिजनों के अनुसार घर पर इलाज और देखभाल में हर महीने करीब 60 से 70 हजार रुपए खर्च हो रहे थे।
भागीरथपुरा दूषित पानी मामले के दौरान पार्वती के इलाज पर शासन स्तर से भी नजर रखी गई थी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अस्पताल पहुंचकर उनकी तबीयत की जानकारी ली थी। परिवार के अनुसार उस समय करीब 19.50 लाख रुपए के इलाज का खर्च शासन की ओर से उठाने का आश्वासन दिया गया था। अब पार्वती की मौत के बाद उनके परिवार के सामने एक बार फिर इलाज और देखभाल से जुड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि उनकी मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसका पहले हुई बीमारी या भागीरथपुरा की दूषित पानी की घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।
