March 8, 2026

जबलपुर में रिटायर्ड अधिकारी 5 दिन तक डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे, ठगों ने उड़ाए 31 लाख रुपये

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मध्य प्रदेश  के जबलपुर में साइबर ठगों ने रिटायर्ड बिजली विभाग के एक अधिकारी को डिजिटल धोखाधड़ी के जाल में फंसाकर 5 दिन तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा। खुद को एटीएस और एनआईए का अधिकारी बताने वाले इन ठगों ने उन्हें आतंकियों से जुड़ा बता कर इतना भयभीत कर दिया कि अधिकारी ने डर के चलते 31 लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में ठगों द्वारा दिए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। मामले का खुलासा तब हुआ, जब उनके बेटे ने पिता की बदली हुई मानसिक स्थिति देखकर सवाल पूछे और सच्चाई सामने आई।

कैसे शुरू हुआ डिजिटल धोखाधड़ी का खेल

नेपियर टाउन निवासी अविनाश चंद्र दीवान, जो बिजली विभाग से सेवानिवृत्त हैं, उन्हें 1 दिसंबर को सोशल मीडिया कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को महाराष्ट्र ATS का अधिकारी बताया और कहा कि आतंकवादियों की जांच में उनका नाम सामने आया है।

ठगों ने:

उनके बैंक खातों में 7 करोड़ रुपये टेरर फंडिंग आने का फर्जी आरोप लगाया

खाते से 70 लाख रुपये कमीशन पाने का झूठा रिकॉर्ड भेजा

गिरफ्तारी और संपत्ति सीज करने की धमकी दी

यह बात किसी को न बताने और घर से बाहर न जाने का आदेश देकर डिजिटल अरेस्ट कर दिया

डराए गए अधिकारी ठगों के इशारे पर उन्हीं की मांगों को पूरा करते रहे।

वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहनकर बनाया दबाव

2 दिसंबर को फिर वीडियो कॉल आया और आरोपी ने पुलिस की यूनिफॉर्म पहनकर खुद को असली अधिकारी साबित करने की कोशिश की। उसने कहा कि जांच पूरी होने तक अधिकारी अपने बैंक खाते के पैसे आरबीआई के विशेष खाते में जमा करें।

इसके बाद दूसरे कॉलर ने खुद को एनआईए अधिकारी बताते हुए एक और खाता दिया और कहा कि जांच के नाम पर उसमें पैसे डालना जरूरी है।

5 दिनों में ट्रांसफर करा लिए 31 लाख रुपये

2 से 5 दिसंबर के बीच:

रिटायर्ड अधिकारी को लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव में रखा गया

उन्हें घर से बाहर निकलने, किसी से बात करने, या कॉल रिसीव करने से मना किया गया

ठग उनसे बार-बार पैसे ट्रांसफर कराते रहे

वे अपनी FD तक तुड़वाने बैंक तक पहुंचे, तब भी ठग उनसे जुड़े रहे और उनकी लोकेशन व गतिविधियों पर नजर बनाए रखी।

बेटे ने समझा कि कुछ गलत है, ऐसे खुला मामला

कई दिनों तक पिता को तनाव में देखकर बेटे ने उनसे पूछा कि क्या बात है। तब रिटायर्ड अधिकारी ने पूरी कहानी बताई।

यह सुनते ही बेटे ने समझ लिया कि यह साइबर धोखाधड़ी है।
उसने तुरंत पिता को मदन महल थाने भेजकर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस कर रही आरोपियों की तलाश

पुलिस ने:

ठगों द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर

फर्जी वीडियो कॉलिंग आईडी

बैंक खातों के विवरण

को तकनीकी जांच में शामिल कर लिया है और आरोपियों की तलाश जारी है।

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