बड़वानी से भोपाल तक IAS काजल जावला का सफर, 29 महीने के कार्यकाल में छोड़ी खास छाप; अब नई जिम्मेदारी के साथ नई पारी
जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 में भी जिले ने उल्लेखनीय काम किया। जनसहयोग से 30155 कंटूर गड्ढे बनाए गए जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 41957 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इस अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को भी बढ़ावा दिया।
महिलाओं की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाले एक बगिया मां के नाम अभियान में भी बड़वानी प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 732 बगिया स्वीकृत हुईं। कानपुरी बोरलाय और मतराला ग्राम पंचायतों को बेहतर प्रदर्शन के कारण प्रदेश की टॉप 10 पंचायतों में स्थान मिला। पंचायत स्तर की उपलब्धियों में भी जिले का प्रदर्शन मजबूत रहा। पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स में मलफा और मोरतलाई ग्राम पंचायतों ने प्रदेश में क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया।
आदि कर्मयोगी अभियान के तहत जिले के 529 गांव चयनित हुए और सभी गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बड़वानी प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि पर जिले को राष्ट्रपति स्तर पर सम्मान भी मिला। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में भी बड़वानी लगातार दूसरे स्थान पर रहा।
शिक्षा के क्षेत्र में भी काजल जावला के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण काम हुए। कायाकल्प अभियान के तहत करीब 600 सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया गया। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली। प्रधानमंत्री पोषण अभियान और मध्यान्ह भोजन योजना की निगरानी से खाद्यान्न उठाव और एसएमएस मॉनिटरिंग का प्रदर्शन 44 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंचा और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही। जनसहयोग से पांच स्कूलों में सरस्वती प्रसादम अभियान भी संचालित हुआ जिसमें बच्चों को भोजन के अलावा फल दही मिठाई और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई।
किसानों और महिलाओं की आय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड कार्यक्रम के तहत चार सब्जी क्लस्टर विकसित किए गए जिससे करीब 450 किसान सब्जी उत्पादन से जुड़े। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 10 तालाबों का निर्माण कराया गया। पाटी विकासखंड में स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराने और आजीविका कैफे तथा कियोस्क के जरिए महिला समूहों की आय बढ़ाने के प्रयास भी किए गए।
जनता की शिकायतों के निराकरण में भी बड़वानी का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए लगातार मॉनिटरिंग की गई और जिला टॉप तीन में बना रहा। अब करीब 29 महीने बाद काजल जावला बड़वानी से विदा हो रही हैं। उनके तबादले के साथ जिम्मेदारी जरूर बदली है लेकिन जल संरक्षण पंचायत विकास शिक्षा और महिला आजीविका के क्षेत्र में किए गए काम उनके कार्यकाल की पहचान बने रहेंगे। अब भोपाल में नई जिम्मेदारी के साथ उनके प्रशासनिक अनुभव का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।
