August 22, 2026

जयंत चौधरी पर टिप्पणी से बढ़ा यूपी सियासी विवाद, अखिलेश यादव के खिलाफ केशव मौर्य और मायावती हुए मुखर

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नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की एक टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव से जयंत चौधरी से माफी मांगने की मांग की है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस बयान को जाट समाज से जोड़ते हुए सपा प्रमुख पर निशाना साधा है।

केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि जयंत चौधरी के खिलाफ की गई टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने सपा प्रमुख से अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा। मौर्य ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीतिक परेशानी के कारण अगड़े, पिछड़े और दलित समाज को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं, जिन्हें उचित नहीं माना जा सकता।

मौर्य ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने सैफई परिवार के लिए काफी कुछ किया था और परिवार पर उनका बड़ा एहसान रहा है। मौर्य के मुताबिक, ऐसे राजनीतिक और पारिवारिक संबंधों की पृष्ठभूमि में जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी पर अखिलेश यादव को विचार करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को सत्ता से दूर रखेगी। मौर्य ने कहा कि भाजपा के साथ अगड़े, पिछड़े और दलित समाज के लोग खड़े हैं। उनके इस बयान को आगामी चुनाव के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

इसी विवाद के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। मायावती ने कहा कि ‘चवन्नी से रुपया’ बनाने वाली टिप्पणी जाट समाज को पसंद नहीं आई है। उन्होंने अखिलेश यादव पर राजनीतिक अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा प्रमुख को अपने बयान के लिए जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और उनका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से जाट समुदाय से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में उनके खिलाफ किसी टिप्पणी को लेकर सामाजिक प्रतिक्रिया का मुद्दा बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि भाजपा और बसपा दोनों ने अखिलेश यादव के बयान को लेकर उन्हें घेरने का प्रयास किया है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। विभिन्न दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे समय में नेताओं के बयानों पर होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रिया चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले मुद्दों का रूप ले सकती है।

फिलहाल विवाद का केंद्र अखिलेश यादव की जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी है। केशव मौर्य और मायावती दोनों ने अलग-अलग तरीके से इस बयान की आलोचना करते हुए माफी की मांग की है। अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अखिलेश यादव इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है।

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