March 9, 2026

कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का विवादित बयान: SC-ST विधायकों की स्थिति ‘कुत्ते जैसी’ आदिवासियों को हिंदू न बनने देने की बात कही

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भोपाल । मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने अपने विवादित बयानों से एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति के विधायकों और सांसदों की स्थिति की तुलना कुत्ते से की है। उनका कहना था कि जब SC/ST समुदाय के जनप्रतिनिधि जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम में आते हैं तो उनकी स्थिति वैसी हो जाती है जैसे कुत्ते के मुंह में बंधी पट्टी जिसे काटने की बात तो छोड़िए वह कुत्ता भौंक भी नहीं सकता। यह बयान भोपाल में कांग्रेस की डिक्लेरेशन-2 ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक के दौरान दिया गया जहां मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

बरैया ने जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम को SC/ST समुदाय के लिए एक बड़ी समस्या बताया। उनका मानना है कि इस व्यवस्था के कारण बाबा साहब अंबेडकर का सपना पूरा नहीं हो सका। वे चाहते हैं कि SC/ST के लिए सेपरेट इलेक्टोरल सिस्टम लागू किया जाए ताकि उनकी स्थिति बेहतर हो सके। बरैया ने आदिवासी समुदाय को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उनका कहना था कि आदिवासियों को हिंदू नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरना धर्म की स्थापना की गई है और आदिवासियों को सरना धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

उनका दावा था कि अगर आदिवासी सरना धर्म अपनाते हैं तो उनके लिए मुक्ति का मार्ग खुल सकता है। बरैया ने यह भी कहा कि आदिवासी आज भी सिविलाइज नहीं हैं और जंगलों के कटने से उनका ज्ञान और संस्कृति प्रभावित हो रही है। यह बयान कांग्रेस पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन सकता है क्योंकि बरैया का यह बयान न केवल समाज के एक बड़े वर्ग को आहत कर सकता है बल्कि पार्टी के भीतर भी विवाद पैदा कर सकता है। इसके अलावा इस तरह के बयान कांग्रेस की छवि को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं खासकर जब पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और विक्रांत भूरिया जैसे लोग मंच पर मौजूद थे।

सेपरेट इलेक्टोरल के संदर्भ में बरैया का बयान यह बताता है कि वे चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव के पक्षधर हैं। सेपरेट इलेक्टोरल एक ऐसी प्रणाली है जिसमें चुनावी प्रक्रिया को जाति धर्म या वर्ग के आधार पर विभाजित किया जाता है। यह व्यवस्था ब्रिटिश काल में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व के लिए लागू की गई थी लेकिन संविधान सभा में इसकी आलोचना हुई और इसे समाप्त कर दिया गया। भारत ने जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम अपनाया जिसमें सभी वर्ग एक साथ वोट डालते हैं लेकिन आरक्षित सीटों पर SC/ST समुदाय के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं।विधायक बरैया के इस बयान ने एक बार फिर उनकी राजनीति और कांग्रेस पार्टी के भीतर के विवादों को सामने ला दिया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस पर किस तरह का रुख अपनाती है।

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