March 10, 2026

कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत

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नई दिल्ली।
रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों (Public sector Refineries) द्वारा कच्चे तेल के आयात (Crude oil Imports) में भारी कटौती (Significant Reduction ) के बाद दिसंबर 2025 में रूस से इस ईंधन को खरीदने के मामले में भारत तीसरे स्थान पर आ गया है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इसके अनुसार भारत द्वारा रूस से कुल हाइड्रोकार्बन आयात दिसंबर में 2.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले महीने के 3.3 अरब यूरो से कम है।

रिपोर्ट में कहा गया, तुर्की भारत को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने रूस से दिसंबर में 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे। चीन शीर्ष खरीदार बना रहा, जिसकी रूस के शीर्ष पांच आयातकों से होने वाली निर्यात आय में 48 प्रतिशत (छह अरब यूरो) की हिस्सेदारी रही।

सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई। रिपोर्ट के अनुसार इस कटौती की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी रही, जिसने दिसंबर में रूस से अपने आयात को आधा कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी आयात में 15 प्रतिशत की कटौती की।


तेल की कीमतें प्रभावित होने के आसार नहीं

क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों पर निकट भविष्य में कोई ठोस प्रभाव पड़ने के आसार नहीं है क्योंकि वैश्विक आपूर्ति में इस लातिन अमेरिकी देश की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत बेहद कम है।

वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में इस देश की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के दिनों में काफी हद तक स्थिर रही हैं जो 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ठीक ऊपर बनी हुई हैं। भारत के संदर्भ में, वेनेजुएला से होने वाला आयात भारत के कुल आयात का 0.25 प्रतिशत से भी कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 14,000 करोड़ रुपये के आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक थी।

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