October 16, 2026

रेलवे ट्रैक के लिए ढाई लाख पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, चोरल के जंगलों में वन्यजीवों और पर्यावरण को लेकर जताई गई चिंता

0
0-1792136216

इंदौर । इंदौर के चोरल जंगलों को बचाने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। सिमरोल से चोरल होते हुए बड़वाह तक प्रस्तावित रेलवे ट्रैक के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। गुरुवार को चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोकजे और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे और वन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस परियोजना के कारण ढाई लाख से अधिक छोटे बड़े पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत में चोरल के जंगलों के पर्यावरणीय महत्व को सामने रखा। दलील दी गई कि ये जंगल इंदौर और मालवा क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। निमाड़ की ओर से आने वाली गर्म हवाओं को रोकने में भी इन जंगलों का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का तापमान बढ़ सकता है। इसके साथ ही भूजल स्तर में गिरावट और बारिश के प्राकृतिक चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई गई।
याचिका में क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले पांच वर्षों से गर्मियों के दौरान इंदौर का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे हालात में यदि ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होती है तो मालवा और निमाड़ के पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है। अदालत में रेलवे ट्रैक के डिजाइन में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि पहले के डिजाइन में लगभग 40 से 50 हजार पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान था लेकिन बाद में डिजाइन बदलने से पेड़ों की कटाई का दायरा काफी बढ़ गया।
सुनवाई के दौरान रेलवे ट्रैक के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। रेलवे की ओर से ढलान अधिक होने और सिमरोल से बड़वाह तक यात्रा में 30 से 40 मिनट अतिरिक्त लगने जैसी व्यावहारिक समस्याओं का हवाला दिए जाने की बात अदालत में रखी गई। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या वास्तव में परियोजना के लिए इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना जरूरी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी।
याचिकाकर्ता ने चोरल जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। अदालत में पेश दलीलों के मुताबिक क्षेत्र में बाघों के 37 और तेंदुओं के 89 पगमार्क दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा चीतल सांभर लोमड़ी मोर और जंगली खरगोश जैसे वन्यजीव भी यहां पाए जाते हैं। आशंका जताई गई कि जंगलों का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि क्षेत्र में लगभग 58 स्थानीय वृक्ष प्रजातियां दुर्लभ होती जा रही हैं और सलाई जैसे पेड़ों का दायरा भी घट रहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विनय सराफ ने जबलपुर खंडपीठ के एक पुराने आदेश का उल्लेख किया। उस मामले में जंगलों की कटाई पर रोक लगाते हुए सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक छंटाई की अनुमति दी गई थी। इसी संदर्भ में चोरल जंगलों के मामले में भी पेड़ों की कटाई रोकने का आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने वन भूमि के उपयोग और पेड़ों की कटाई से जुड़े दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत कराने के साथ ही वानिकी वन्यजीव पारिस्थितिकी और पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। फिलहाल हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से प्रस्तावित कटाई पर विराम लग गया है। अब रेलवे और वन विभाग के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *