भोपाल: सूखी सेवनिया स्टेशन पर 'ट्रेन हादसा' छत काटकर निकाले गए यात्री, NDRF और रेलवे की जॉइंट मॉक ड्रिल में दिखा रेस्क्यू का दम!
रेस्क्यू ऑपरेशन: गैस कटर से काटी गई ट्रेन की छत
मॉक ड्रिल को इतना वास्तविक रूप दिया गया था कि ड्रिल के दौरान ट्रेन के कोचों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ा हुआ दिखाया गया। अंदर फंसे ‘यात्रियों’ को बचाने के लिए टीमों ने निम्नलिखित कदम उठाए:
कटर का इस्तेमाल: कोच के भीतर फंसे यात्रियों तक पहुँचने के लिए NDRF की टीम ने हाइड्रोलिक और गैस कटर का उपयोग कर खिड़कियों के शीशे तोड़े और ट्रेन की छत को काटकर रास्ता बनाया।
बोगी के नीचे फंसे डमी यात्रियों को निकालने के लिए आधुनिक ‘हाई-प्रेशर एयरबैग्स’ का सहारा लिया गया, जिससे भारी-भरकम कोच को उठाकर रास्ता बनाया गया।बाहर निकाले गए यात्रियों को तुरंत मौके पर मौजूद रेलवे मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया और एम्बुलेंस के जरिए ‘अस्पताल’ रवाना किया।
अफसरों की मौजूदगी: डीआरएम ने खुद परखा रिस्पांस टाइम
इस पूरी ड्रिल के दौरान भोपाल रेल मंडल के प्रबंधक (DRM) पंकज त्यागी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने बचाव कार्य की बारीकियों का निरीक्षण किया और टीमों के तालमेल को सराहा।ड्रिल में रेलवे के आरपीएफ (RPF), जीआरपी (GRP), मेडिकल विंग और NDRF के जवानों ने एक साथ काम किया।स्टेशन मास्टर से सूचना मिलने के बाद राहत ट्रेनों के पहुँचने और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने तक का समय ‘गोल्डन ऑवर’ के मानकों के अनुरूप रहा।
सुरक्षा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास है। सूखी सेवनिया में हुई यह मॉक ड्रिल इस बात का प्रमाण है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में हमारी रेलवे और राहत टीमें कम से कम समय में जान-माल की रक्षा करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
