देवशयनी एकादशी पर भोपाल में उमड़ी आस्था सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया। सुंदरकांड के प्रत्येक चौपाई और दोहे के साथ पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और हनुमानजी की अटूट भक्ति का स्मरण करते हुए सुख समृद्धि और समाज के कल्याण की कामना की।
सुंदरकांड पाठ के पश्चात आयोजित भजन संध्या ने पूरे माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। प्रसिद्ध भजन गायक रुपेश राज और हरीश कुशवाहा ने श्रीराम और हनुमानजी की महिमा का गुणगान करते हुए एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किए। उनकी मधुर प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन होकर झूमते रहे। पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत और जयकारों से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावपूर्ण क्षण 111 दीपों से की गई भव्य महाआरती रही। दीपों की दिव्य रोशनी और आरती की गूंज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। महाआरती के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और सभी ने धर्म एवं समाज की उन्नति की प्रार्थना की।
नवयुवक मंडल साहू समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यह मंडल का पहला सामूहिक धार्मिक आयोजन था। इसका उद्देश्य समाज में धार्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल सके।
इस अवसर पर प्रदेश जिला और स्थानीय इकाइयों के पदाधिकारी समाज के वरिष्ठजन महिलाएं युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज को एकजुट करने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।
देवशयनी एकादशी के इस भव्य आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे बढ़ता है तो आस्था के साथ साथ सामाजिक एकता भी मजबूत होती है। सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने इस धार्मिक उत्सव को श्रद्धा भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का यादगार आयोजन बना दिया।
