September 26, 2026

भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग

0
untitled-1790407295

भोपाल । भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद अब अगले चरण में पहुंच गई है। 21 साल से लंबित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार को इसे प्रकाशित करने और लोगों से दावे आपत्तियां लेने की अनुमति मिल गई है। हालांकि ड्राफ्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां तत्काल वैध हो जाएंगी या सीलिंग की कार्रवाई रुक जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में मौजूदा मास्टर प्लान और लागू बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर कार्रवाई जारी रखने की स्थिति स्पष्ट की है।

22 सितंबर को हुई सुनवाई के आदेश में भोपाल का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और इसे प्रकाशित कर लोगों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित करने की अनुमति चाहिए। अदालत ने ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है लेकिन अंतिम मास्टर प्लान को लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी देना और आवश्यक अनुमति लेना जरूरी रहेगा। इसका मतलब है कि ड्राफ्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है लेकिन अंतिम प्लान पर अभी अदालत की निगरानी बनी रहेगी।

सीलिंग के मामले में भी अदालत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। फिलहाल किसी जमीन या भवन में चल रही गतिविधि की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान और संबंधित बिल्डिंग नियमों के आधार पर जांची जाएगी। यदि कोई क्षेत्र विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और वहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है तो अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में केवल नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में संभावित लैंडयूज बदलाव का प्रस्ताव तत्काल राहत का आधार नहीं बनेगा।

अदालत ने उन इलाकों को अलग माना है जहां मौजूदा मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को स्पष्ट रूप से किसी एक श्रेणी में निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे स्थानों पर मिश्रित उपयोग के सवाल पर विचार किया जा सकता है लेकिन फिलहाल वहां यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं अगर कोई निर्माण पूरी तरह बिना अनुमति के हुआ है तो कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

भोपाल में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर पहले से ही कार्रवाई चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नगर निगम ने बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया है और कई मामलों में नोटिस तथा कार्रवाई की गई है। इस दौरान कुछ प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने की शिकायतें भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई थीं। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव या चुनिंदा तरीके से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

अब कारोबारियों और रहवासियों की नजर नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर है। ड्राफ्ट सामने आने के बाद लोग अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद सरकार को अंतिम प्लान की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ड्राफ्ट में किसी क्षेत्र के लैंडयूज में बदलाव प्रस्तावित होने मात्र से वहां चल रही मौजूदा व्यावसायिक गतिविधि स्वतः वैध नहीं मानी जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *