August 22, 2026

राजस्थान से ATS ने पकड़ा तीसरा आरोपी, भोपाल कनेक्शन की जांच तेज; युवाओं को जोड़ने और नेटवर्क फैलाने की साजिश का आरोप

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मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने कथित आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। एटीएस के अनुसार आरोपी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और कथित नेटवर्क के संचालन में उसकी सक्रिय भागीदारी सामने आई है। अदालत में पेशी के बाद उसे 20 जून तक रिमांड पर भेज दिया गया है।

इस मामले में पहले भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह और उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार फराज पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को विभिन्न ग्रुपों से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस का कहना है कि आरोपी कई वर्षों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था और उसके ऑनलाइन नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि फराज को कथित तौर पर नई पहचान देकर सोशल मीडिया नेटवर्क बढ़ाने और युवाओं तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया था। एटीएस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि उसके संपर्क किन लोगों से थे और कथित नेटवर्क का विस्तार किन-किन क्षेत्रों तक था।

फराज की निशानदेही पर उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के देवबंद से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी पूरे नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दोनों आरोपियों से अलग-अलग तथा आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है ताकि कथित साजिश की परतें खोली जा सकें।

गौरतलब है कि एटीएस ने गुरुवार तड़के भोपाल के काजी कैंप इलाके में फराज के घर पर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया था। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार फराज स्थानीय स्तर पर एक निजी क्लीनिक में काम करता था और उसने देवबंद में धार्मिक शिक्षा भी प्राप्त की थी। वहीं उसकी मुलाकात नईम अब्दुल्ला से हुई थी।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल साक्ष्य हैं। फराज का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क देश और विदेश में किन लोगों से थे।

इसके अलावा कथित विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है। एटीएस बैंकिंग रिकॉर्ड, लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि किसी संदिग्ध आर्थिक सहायता के स्रोत का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

मामले में एटीएस, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य जांच इकाइयों के सहयोग से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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