March 8, 2026

MP में 25 सरकारी कर्मी चिह्नित: स्कॉलरशिप के लिए OBC, नौकरी के लिए बने आदिवासी! defrauded

0
fack-1765109436

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के सहारे सरकारी नौकरियां हासिल करने का बड़ा घोटाला सामने आया है। एसटीएफ STF की जांच में पता चला है कि कई विभागों में वर्षों से नौकरी कर रहे 25 अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने पहले खुद को ओबीसी OBC वर्ग का बताया और उसी आधार पर छात्रवृत्ति लेकर पढ़ाई की लेकिन नौकरी पाते समय अचानक अनुसूचित जनजाति ST बनकर आरक्षण का लाभ ले लिया। इस तरह इन लोगों ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाईं बल्कि आदिवासी समुदाय के हक पर भी सीधा डाका डाल दिया।

ओबीसी से पढ़ाई और एसटी से नौकरी- दोहरा खेल उजागर
जांच में सामने आया कि इन सभी लोगों ने स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई के दौरान खुद को ओबीसी वर्ग का बताया था। छात्रवृत्ति आवेदन कॉलेज एडमिशन दस्तावेज और पुराने जाति प्रमाण-पत्रों में इनकी जाति स्पष्ट रूप से OBC दर्ज थी। लेकिन नौकरी की बारी आते ही इन्होंने नया जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर खुद को अनुसूचित जनजाति घोषित कर लिया और आरक्षण के आधार पर सरकारी पद पा लिए। इस तरह न केवल सरकारी नौकरियों में गलत तरीके से जगह बनाई गई बल्कि वर्षों तक वेतन प्रमोशन और अन्य सुविधाएं भी गलत आधार पर हासिल की गईं।

आदिवासी समुदाय के हक पर चोट
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार इन फर्जी प्रमाण-पत्रों ने आदिवासी वर्ग की वास्तविक पात्रता को भारी नुकसान पहुंचाया है। जो पद आदिवासी युवाओं के लिए आरक्षित थे वे इन लोगों ने धोखाधड़ी से कब्जा लिए। एसटीएफ ने अभी तक 25 अधिकारी-कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इसके अलावा आठ ऐसे लोग और रडार पर हैं जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों के सत्यापन में मदद की थी। इन्हें भी जल्द एफआईआर में शामिल किया जाएगा  फर्जी प्रमाण-पत्र से नौकरी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सूची जांच में सामने आए प्रमुख नाम इस प्रकार हैं-

चिकित्सा विभाग GRMC ग्वालियर
डॉ. दिनेश माझी

डॉ. सीमा बाथम

डॉ. रजनीश माझी

डॉ. विनोद बाथम  अन्य चिकित्सा/फार्मेसी विभाग

डॉ. रेखा बाथम आयुर्वेदिक कॉलेज आमखो

डॉ. महेंद्र बाथम फार्मासिस्ट शिवपुरी

शिक्षा विभाग 
शिक्षक जवाहर सिंह केवट

शिक्षक सीताराम केवट

शिक्षक सरला माझी

शिक्षक कुसुम मांझी

शिक्षक राजेश केवट

शिक्षक बाबूलाल रावत

शिक्षक सुनीता रावत

शिक्षक दशरथ रावत गुना

पुलिस विभाग

आरक्षक हेमंत बाथम साइबर सेल ग्वालियर

गीतिका बाथम एसआई पुलिस मुख्यालय भोपाल

लोकेंद्र बाथम 25वीं बटालियन भोपाल

आरक्षक महेश बाथम शिवपुरी

आरक्षक नाहर सिंह शिवपुरी

सूबेदार अनिल बाथम यातायात पुलिस श्योपुर

अन्य विभाग

भागीरथी माझी स्टेनो गुना

अनुपम मांझी स्टेनो गुना

देवीलाल ढीमर स्टेनो राजगढ़

मनीष गौतम महाप्रबंधक बिजली कंपनी बैतूल

हाकिम बाथम जेई बिजली कंपनी होशंगाबाद

यश कुमार सिंह संयुक्त संचालक उद्यान विभाग दमोह सूची में शामिल अधिकांश अधिकारी कई वर्षों से अपने-अपने विभागों में सेवा दे रहे हैं। विभागों में कार्रवाई अब तक शून्य एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अभी तक किसी भी विभाग ने इन पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की है।ना निलंबन हुआ न सेवा समाप्ति और न ही प्रमाण-पत्र की जांच की दिशा में तेज कदम उठाए गए। एसटीएफ का कहना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत फर्जीवाड़ा नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क का घोटाला है- फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वाले सत्यापन कराने वाले  प्रक्रिया को क्लियर करने वाले कर्मचारी  सभी इसके दायरे में आएंगे।

फर्जी प्रमाण-पत्र उद्योग की ओर इशारा

जांचकर्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल शुरुआत है। ऐसे कई और लोग विभिन्न विभागों में हो सकते हैं जिनकी डिग्रियां जाति प्रमाण-पत्र और दस्तावेज संदेह के घेरे में हैं। हाल ही में STF ने D.Ed की फर्जी मार्कशीट से शिक्षक बने 34 लोगों को भी पकड़ा था जो बताता है कि प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। ग्वालियर और आसपास के जिलों में सामने आया यह फर्जी जाति प्रमाण-पत्र घोटाला न केवल सरकारी व्यवस्था की कमजोरी को दिखाता है बल्कि उन आदिवासी युवाओं के हितों पर भी गहरी चोट करता है जो सही पात्रता के बावजूद बेरोजगार रह जाते हैं।अब नजर इस बात पर है कि विभाग कब और कैसे इन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करता है और व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *