March 10, 2026

मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन पदों की कमी से शिक्षा व्यवस्था पर असर

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मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और शिक्षक चयन परीक्षाओं में घोषित किए गए पदों की संख्या पर बढ़ते विरोध के चलते मंगलवार को भोपाल में एक बड़ा आंदोलन हुआ। प्रदेशभर से लगभग 2000 भावी शिक्षक राजधानी पहुंचे और लोक शिक्षण संचालनालय DPI तथा जनजातीय कार्य विभाग का घेराव करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हजारों खाली पदों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बहुत कम घोषित की गई है जिससे न सिर्फ योग्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल रहा बल्कि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो वे अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन और भूख हड़ताल जैसे कठोर चरणों में बदल देंगे। यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में किया जा रहा है।

प्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षक के लिए लगभग 99197 और प्राथमिक शिक्षक के लिए 131152 पद रिक्त हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया में केवल 10800 और 13089 पदों पर ही नियुक्तियां की जा रही हैं जो खाली पदों के मुकाबले बेहद कम हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि इन कम पदों के कारण लाखों योग्य उम्मीदवार अपनी योग्यताएं साबित नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए कई विषयों में शून्य पद घोषित करने का भी आरोप लगाया है जिससे इन वर्गों के युवाओं में गहरी निराशा और आक्रोश है। उनका कहना है कि यह स्थिति सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है और इससे आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

शिक्षक संगठनों ने भी इस समस्या को गंभीरता से उठाया है क्योंकि यह स्थिति छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डाल रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं जिससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है बल्कि परीक्षा परिणामों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को सुधारने की बात की गई है लेकिन पर्याप्त नियुक्तियां किए बिना इसे लागू करना संभव नहीं है।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती के सभी विषयों में कम से कम 3000 पदों की वृद्धि प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 25000 करना और द्वितीय काउंसलिंग जल्द शुरू करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक शिक्षक भर्ती 2025 पदों के साथ पूरी नहीं हो जाती तब तक नई पात्रता परीक्षा आयोजित न की जाए।

यह आंदोलन केवल पदों की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और हजारों युवा उम्मीदवारों को रोजगार देने का एक संघर्ष बन चुका है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या यह आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल हो पाता है

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