हर्निया और साइटिका से बचाव में कारगर है उपविष्ठ कोणासन, महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद
उपविष्ठ कोणासन एक ऐसा योगासन है, जो शरीर के निचले हिस्से पर विशेष रूप से कार्य करता है। इस आसन में दोनों पैरों को फैलाकर बैठा जाता है और धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान जांघों, हैमस्ट्रिंग, पेल्विक क्षेत्र, रीढ़ की हड्डी और पेट की मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन बढ़ता है और मांसपेशियों की जकड़न कम होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार उपविष्ठ कोणासन का सबसे बड़ा लाभ हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों को मिलता है। लंबे समय तक बैठे रहने के कारण ये मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, जिससे चलने-फिरने और झुकने में परेशानी हो सकती है। इस आसन के दौरान होने वाला खिंचाव मांसपेशियों को लचीला बनाता है और शरीर की गतिशीलता को बेहतर करता है। यही कारण है कि ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
यह योगासन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को भी बेहतर बनाने का काम करता है। शरीर के इस हिस्से में कई महत्वपूर्ण अंग मौजूद होते हैं, जिनके स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त रक्त प्रवाह जरूरी है। उपविष्ठ कोणासन के अभ्यास से इस क्षेत्र में रक्त का संचार बढ़ता है, जिससे अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।
हर्निया की रोकथाम में भी इस आसन को उपयोगी माना जाता है। हर्निया की समस्या अक्सर पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से उत्पन्न होती है। उपविष्ठ कोणासन पेट और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे शरीर के अंदरूनी अंगों को बेहतर सहारा मिलता है और हर्निया का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को पहले से हर्निया है, उन्हें यह आसन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।
साइटिका के मरीजों के लिए भी यह योगासन राहत देने वाला माना जाता है। साइटिका में नसों पर दबाव के कारण कमर से लेकर पैरों तक दर्द महसूस होता है। इस आसन से होने वाला नियंत्रित खिंचाव नसों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे दर्द और असहजता में राहत मिल सकती है।
महिलाओं के लिए भी उपविष्ठ कोणासन कई मायनों में फायदेमंद है। यह पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाकर हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास मासिक धर्म चक्र को संतुलित रखने और पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द एवं ऐंठन को कम करने में सहायक माना जाता है।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी योगासन का लाभ तभी मिलता है जब उसे सही तकनीक और नियमितता के साथ किया जाए। इसलिए शुरुआती लोगों को प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में ही उपविष्ठ कोणासन का अभ्यास करना चाहिए। सही तरीके से किया गया यह योगासन शरीर को लचीला, मजबूत और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
