September 18, 2026

नींद में बोलना सिर्फ सपना नहीं हो सकता बार बार बड़बड़ाने की आदत के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह

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नई दिल्ली। रात में सोते समय अचानक बोलना या बड़बड़ाना कई लोगों के साथ होता है। अक्सर परिवार के दूसरे सदस्य इस आदत को नोटिस करते हैं जबकि बोलने वाले व्यक्ति को सुबह उठने के बाद इसकी जानकारी भी नहीं होती। आमतौर पर नींद में बोलना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता और कई मामलों में यह अपने आप होने वाली सामान्य नींद संबंधी प्रक्रिया है। फिर भी अगर यह समस्या लगातार होने लगे या इसके साथ नींद में अन्य असामान्य गतिविधियां दिखाई दें तो इसके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी हो जाता है।

नींद में बोलने या बड़बड़ाने की स्थिति को सोमनीलोक्वी कहा जाता है। इसे पैरासोमनिया यानी नींद के दौरान होने वाले असामान्य व्यवहारों की श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान व्यक्ति नींद में शब्द बोल सकता है या कभी कभी पूरे वाक्य भी कह सकता है। कई लोगों को सुबह उठने पर यह याद नहीं रहता कि उन्होंने रात में कुछ कहा था। कुछ स्थितियों में नींद में बोलने के साथ हाथ पैर हिलाना या अचानक करवट बदलना जैसी गतिविधियां भी देखी जा सकती हैं।

नींद में बड़बड़ाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सपने इसका एक सामान्य कारण माने जाते हैं। जब व्यक्ति सपने देख रहा होता है तो दिमाग अलग अलग भावनाओं और घटनाओं को संसाधित करता रहता है। इसी दौरान कभी कभी नींद में आवाज निकल सकती है। दिनभर की घटनाओं का मानसिक दबाव भी नींद के दौरान व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। खासकर तनाव और चिंता की स्थिति में नींद प्रभावित हो सकती है और नींद में बोलने की संभावना बढ़ सकती है।

बुरे सपने भी नींद में बोलने का एक कारण हो सकते हैं। डर या तनाव से जुड़े सपने के दौरान कुछ लोग नींद में बोलते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति जो नींद में बोलता है वह किसी मानसिक या शारीरिक बीमारी से परेशान है। कई स्वस्थ लोगों में भी कभी कभी ऐसा देखा जा सकता है।

नींद की कमी और अनियमित सोने का समय भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। अगर व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है या पर्याप्त नींद नहीं लेता है तो नींद का सामान्य चक्र प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से सोने और जागने का समय नियमित रखना जरूरी है। इसके साथ ही सोने से पहले चाय कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि ये कुछ लोगों में नींद को प्रभावित कर सकते हैं। शराब का सेवन भी नींद की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।

बेहतर नींद के लिए सोने से पहले मोबाइल और दूसरे स्क्रीन टाइम को कम करना भी मददगार हो सकता है। कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक रखना चाहिए। किताब पढ़ना हल्का संगीत सुनना या कुछ देर शांत होकर बैठना दिमाग को आराम देने वाली दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

अगर नींद में बोलना कभी कभी होता है और इससे व्यक्ति की नींद या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं हो रही है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए या इसके साथ नींद में हिंसक हरकतें तेज चीखना चलना बार बार बुरे सपने आना या दिन में अत्यधिक नींद जैसी परेशानी हो तो डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है। सही कारण की पहचान के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि समस्या सामान्य है या किसी अन्य स्लीप डिसऑर्डर से जुड़ी हुई है।

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