स्वाद के चक्कर में सेहत से न करें खिलवाड़, मटन में मौजूद ये तत्व बढ़ा सकते हैं कैंसर और यूरिक एसिड की परेशानी
दरअसल शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आयरन की जरूरत होती है। यह हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अलग-अलग अंगों और ऊतकों तक पहुंचाता है। रेड मीट में हीम आयरन पाया जाता है जिसे शरीर पौधों से मिलने वाले आयरन की तुलना में आसानी से अवशोषित कर सकता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन और विटामिन बी12 भी होता है। ये पोषक तत्व खून बनाने और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक मात्रा में मटन खाना सेहत के लिए फायदेमंद ही रहेगा।
बड़ी आंत के कैंसर का बढ़ सकता है जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रेड मीट का अधिक सेवन पाचन तंत्र पर असर डाल सकता है। इसमें मौजूद हीम आयरन शरीर में कुछ रासायनिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे सकता है। इन प्रक्रियाओं के कारण एन-नाइट्रोसो कंपाउंड जैसे हानिकारक तत्व बनने की आशंका रहती है। ये तत्व कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक इस तरह की क्षति कैंसर के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। विशेष रूप से बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर को लेकर चिंता जताई जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर संबंधी एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने वर्ष 2015 में रेड मीट को ग्रुप 2A यानी संभवतः कैंसरकारी श्रेणी में रखा था। इसका अर्थ है कि रेड मीट और कैंसर के बीच संबंध के कुछ वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं लेकिन इस संबंध को लेकर प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे लेकर जागरूक रहना जरूरी है। हालांकि कभी-कभार रेड मीट खाने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को कैंसर हो ही जाएगा।
दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है असर
रेड मीट के अधिक सेवन से हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके कुछ हिस्सों में सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है। इसका ज्यादा सेवन खून में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकता है। जब खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है तो धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर फैट जमा होने लगता है। धीरे-धीरे धमनियां संकरी और सख्त हो सकती हैं। इससे दिल का दौरा और स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है।
रेड मीट में एल-कार्निटाइन नामक तत्व भी पाया जाता है। आंतों में मौजूद कुछ बैक्टीरिया इसे तोड़कर टीएमएओ नामक पदार्थ बना सकते हैं। टीएमएओ के बढ़े हुए स्तर को भी हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जोड़ा गया है। हालांकि इस प्रक्रिया और हृदय रोगों के बीच संबंध को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
यूरिक एसिड और जोड़ों के दर्द की परेशानी
रेड मीट में प्यूरिन भी पाया जाता है। शरीर में प्यूरिन के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है तो इसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो सकते हैं। इससे गाउट की समस्या पैदा हो सकती है। इस स्थिति में जोड़ों में तेज दर्द लालिमा और सूजन महसूस हो सकती है। जिन लोगों को पहले से यूरिक एसिड या गाउट की परेशानी है उन्हें रेड मीट के सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
कुल मिलाकर रेड मीट में कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद हैं लेकिन इसका अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। बेहतर है कि खानपान में संतुलन रखा जाए और प्रोटीन के लिए दालें चना राजमा सोया मछली तथा अन्य पौष्टिक विकल्पों को भी शामिल किया जाए। रेड मीट खाने वालों को इसकी मात्रा और सेवन की आवृत्ति पर ध्यान देना चाहिए। खासकर प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज और बेकन का सेवन सीमित रखना जरूरी है। किसी बीमारी या विशेष डाइट संबंधी जरूरत होने पर डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर रहता है।
