September 5, 2026

मलेरिया कब बन सकता है जानलेवा? बुखार से लेकर बेहोशी तक इन संकेतों को पहचानें, डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

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नई दिल्ली । मानसून के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है और इनमें मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसे नजरअंदाज करना कई बार गंभीर पड़ सकता है। तेज बुखार ठंड लगना कंपकंपी सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण अक्सर सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लगते हैं लेकिन यही संकेत मलेरिया की शुरुआत भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार के साथ ठंड और कंपकंपी महसूस हो रही है तो इसे हल्के में लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेकर समय पर जांच करानी चाहिए।

मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाला परजीवी संक्रमण है। इसकी शुरुआत कई बार सामान्य बुखार की तरह होती है जिसके कारण लोग इसे वायरल फीवर समझकर घर पर ही इलाज शुरू कर देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार तेज बुखार के साथ सिरदर्द ठंड लगना कंपकंपी कमजोरी मतली या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें तो सतर्क हो जाना चाहिए। केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को मलेरिया है या नहीं इसलिए समय पर जांच कराना सबसे जरूरी कदम माना जाता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि मलेरिया का संदेह होने पर खुद से एंटी मलेरियल दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से सही बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है और स्वास्थ्य संबंधी दूसरी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। डॉक्टर जांच के परिणाम और मरीज की स्थिति के आधार पर बीमारी का प्रकार तथा सही इलाज तय करते हैं। समय रहते मलेरिया की पहचान हो जाए और उचित उपचार शुरू कर दिया जाए तो गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इलाज शुरू होने के बाद भी मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कई बार दवा लेने के बाद बुखार या कमजोरी कम होने लगती है और मरीज खुद को ठीक मानकर दवा बीच में ही बंद कर देते हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा की मात्रा कम या ज्यादा करना और इलाज की अवधि बदलना भी उचित नहीं है। मलेरिया का उपचार मरीज की स्थिति और संक्रमण के प्रकार के अनुसार तय किया जाता है इसलिए पूरी दवा और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है।

कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें मलेरिया की गंभीर स्थिति का संकेत माना जा सकता है। अत्यधिक कमजोरी बार बार उल्टी होना सांस लेने में परेशानी पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाना असामान्य रक्तस्राव चेतना या व्यवहार में बदलाव भ्रम बेहोशी और दौरे पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। गंभीर मामलों में शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है इसलिए ऐसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

छोटे बच्चों विशेषकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं में मलेरिया को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में भी संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए बुखार लंबे समय तक बना रहे या अचानक हालत बिगड़ने लगे तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।

मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और खासकर शाम तथा रात के समय मच्छरों के काटने से बचाव करें। याद रखें तेज बुखार और कंपकंपी को सामान्य समझकर टालना सही नहीं है। समय पर जांच सही इलाज और गंभीर लक्षणों पर तुरंत अस्पताल पहुंचना ही मलेरिया से होने वाले बड़े खतरे को कम करने का सबसे सुरक्षित तरीका है

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