September 10, 2026

बीमारी से बचना है तो आज से बदलें अपनी दिनचर्या: सही खानपान नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद और तनाव पर काबू रखने से ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

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नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना अनियमित खानपान नींद की कमी तनाव और शारीरिक गतिविधि का कम होना धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकता है। अच्छी सेहत के लिए किसी एक दिन की मेहनत काफी नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे और लगातार बदलाव जरूरी होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ खानपान नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद तंबाकू से दूरी और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल खुद की सेहत संभालने के अहम हिस्से हैं।

स्वास्थ्य देखभाल की शुरुआत सबसे पहले भोजन से होती है। रोज के खाने में अलग अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है। साबुत अनाज दालें फल सब्जियां और जरूरत के अनुसार प्रोटीन के अच्छे स्रोत भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। दूसरी तरफ बहुत ज्यादा नमक चीनी अस्वास्थ्यकर वसा और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। WHO के अनुसार स्वस्थ आहार पर्याप्तता संतुलन संयम और विविधता जैसे सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

इसके साथ शारीरिक गतिविधि को रोज की दिनचर्या में जगह देना बेहद जरूरी है। इसके लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिम जाए। तेज चाल से चलना साइकिल चलाना तैरना योग करना खेलना या रोजमर्रा के कामों में सक्रिय रहना भी शारीरिक गतिविधि का हिस्सा हो सकता है। WHO के अनुसार वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या उसके बराबर अधिक तीव्र गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। जो लोग लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं उन्हें अचानक बहुत ज्यादा व्यायाम करने के बजाय धीरे धीरे शुरुआत करनी चाहिए।

स्वास्थ्य देखभाल में नींद को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए। देर रात तक मोबाइल चलाना लगातार काम करना और सोने का समय बदलते रहना शरीर की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और शांत वातावरण बनाना भी बेहतर नींद की आदत विकसित करने में मदद कर सकता है। अगर लंबे समय तक नींद से जुड़ी समस्या बनी रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य भी शरीर की सेहत से अलग नहीं है। लगातार तनाव चिंता चिड़चिड़ापन या थकान महसूस होने पर व्यक्ति को अपने काम के बीच आराम और सामाजिक जुड़ाव के लिए समय निकालना चाहिए। परिवार और दोस्तों से बातचीत करना पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खुद की देखभाल का मतलब यह नहीं है कि बीमारी होने पर डॉक्टर की जरूरत नहीं है। WHO भी स्पष्ट करता है कि self care स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों की जगह नहीं लेती बल्कि उनकी देखभाल को बेहतर तरीके से पूरा करती है।

तंबाकू से दूरी बनाना भी स्वास्थ्य सुरक्षा का बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इसी तरह शराब के सेवन से बचना या उसे सीमित करना कई स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारी है उन्हें नियमित जांच और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए। WHO की सलाह के मुताबिक जीवनशैली में बदलाव कई बीमारियों के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं लेकिन कई स्थितियों में दवा और चिकित्सकीय निगरानी भी जरूरी रहती है।

सबसे जरूरी बात यह है कि स्वस्थ रहने के लिए किसी बड़े बदलाव का इंतजार न करें। रोज थोड़ी शारीरिक गतिविधि पौष्टिक भोजन पर्याप्त आराम तनाव को संभालने की कोशिश और समय पर चिकित्सकीय सलाह जैसी छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा अंतर ला सकती हैं। अपने शरीर के संकेतों को समझना और लगातार बनी रहने वाली परेशानी को नजरअंदाज न करना भी उतना ही जरूरी है। स्वास्थ्य की सही देखभाल बीमारी के बाद शुरू नहीं होती बल्कि बीमारी से बचाव और बेहतर जीवनशैली की आदतों से पहले ही शुरू हो जाती है।

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