हेल्दी डाइट के नाम पर इन पोषण संबंधी धारणाओं पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, गलत तरीके से अपनाने पर फायदे की जगह नुकसान हो सकता है
आहार को लेकर अक्सर हमारे मन में कई सारे सवाल रहते हैं। सुबह खाली पेट क्या पीना चाहिए, कौन-सा फल कब खाना चाहिए, कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह छोड़ देना चाहिए या रात में खाना खाने से मोटापा बढ़ेगा? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि स्वस्थ आहार के चार आधार हैं, पर्याप्तता, संतुलन, सीमित मात्रा और विविधता। यानी सिर्फ एक चीज को डाइट में जोड़ लेना या किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह हटा देना स्वस्थ खानपान की गारंटी नहीं है।
एक और बड़ा भ्रम यह भी है कि जो चीज प्राकृतिक हैं, वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित और फायदेमंद भी होगी। ऐसे में हेल्दी डाइट के नाम पर अपनाई जा रही कुछ धारणाओं को समझना जरूरी है, ताकि फायदे की जगह नुकसान से बचा जा सके।
शरीर के पोषण का रखें ध्यान
लोगों को सही खानपान और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि अच्छा स्वास्थ्य केवल भरपेट खाने से नहीं, बल्कि शरीर को नियमित रूप से सही पोषक तत्व जैसे विटामिन्स, प्रोटीन और खनिज मिलने से बनता है।
हमारे समाज में खान-पान को लेकर कई तरह की धारणाएं और मिथक प्रचलित हैं, जिनका लोग बिना पूरी जानकारी के पालन करते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट, फलों और सप्लीमेंट्स से जुड़ी धारणाएं प्रमुख हैं।
मिथ: कार्बोहाइड्रेट का मतलब वजन बढ़ाने वाली चीज
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें सेहत के लिए आवश्यक हैं और इन्हें पूरी तरह वजन बढ़ाने वाला पोषक तत्व मानना सही नहीं है। कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। समस्या कार्बोहाइड्रेट की मौजूदगी से ज्यादा उसके स्रोत से जुड़ी होती है।
साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियों से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट शरीर को स्वस्थ रखने और काम करने की ऊर्जा देते हैं। वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थों से मिलने वाला कार्बोहाइड्रेट लंबे समय में वजन और ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने वाला हो सकता है।
मिथ: फल जितना ज्यादा खाएंगे, उतना ज्यादा फायदा
फलों को हेल्दी डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, लेकिन इन्हें भी संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए। ज्यादा मात्रा में फलों के सेवन से भी नुकसान हो सकते हैं। 10 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को रोजाना कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। इससे अधिक मात्रा में कुछ फल वजन बढ़ने, शुगर और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
मिथ: सप्लीमेंट्स से पूरी हो जाएगी पोषक तत्वों की कमी
अच्छी सेहत पाने के लिए खुद से सप्लीमेंट लेना शुरू कर देना नुकसानदायक हो सकता है। सप्लीमेंट की जरूरत शरीर में पोषक तत्वों की कमी और चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर तय की जाती है। खुद से कोई सप्लीमेंट शुरू करना कई बार फायदे से ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार का सेवन शरीर की जरूरतें पूरी करने का अधिक सुरक्षित तरीका माना जाता है।
