March 8, 2026

सावधान! पेपर कप में चाय-कॉफी पीना बन सकता है सेहत के लिए ज़हर, कैंसर और थायरॉइड का बढ़ता खतरा

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नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चाय और कॉफी पीने के लिए पेपर कप का इस्तेमाल आम हो गया है। ऑफिस, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और स्ट्रीट वेंडर्स पर इन्हें सुरक्षित और इको-फ्रेंडली मानकर धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी चौंकाने वाली है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक पेपर कप में गर्म चाय या कॉफी पीना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है और इससे कैंसर व थायरॉइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

दरअसल, पेपर कप पूरी तरह कागज से नहीं बने होते। इन्हें वाटरप्रूफ बनाने के लिए अंदर की परत में प्लास्टिक या वैक्स कोटिंग की जाती है। जब इनमें गर्म पेय डाला जाता है, तो यह परत पिघलने लगती है और उससे हानिकारक केमिकल्स और माइक्रोप्लास्टिक चाय-कॉफी में मिल जाते हैं, जो सीधे शरीर में पहुंचते हैं।

सेहत पर कैसे पड़ता है असर?
डॉक्टर्स के अनुसार, पेपर कप में मौजूद BPA (बिसफेनोल-A) और अन्य केमिकल्स गर्म तरल के संपर्क में आकर एक्टिव हो जाते हैं। इनका लगातार सेवन करने से हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड की समस्या, और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा, माइक्रोप्लास्टिक कण पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एसिडिटी, पेट दर्द, गैस, अपच और आंतों से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रोजाना पेपर कप में गर्म पेय पीने से शरीर में टॉक्सिन्स धीरे-धीरे जमा होने लगते हैं।

पर्यावरण के लिए भी खतरा
पेपर कप सिर्फ सेहत ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं। प्लास्टिक कोटिंग के कारण इन्हें पूरी तरह रिसायकल करना मुश्किल होता है। जलाने पर ये जहरीली गैसें छोड़ते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।

क्या करें, क्या न करें
अगर आप खुद को और अपने परिवार को इन खतरों से बचाना चाहते हैं, तो पेपर कप का इस्तेमाल कम से कम करें। चाय-कॉफी पीने के लिए स्टील, कांच या सिरेमिक कप सबसे सुरक्षित माने जाते हैं। ये न केवल सेहत के लिए बेहतर हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार हैं।

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