June 19, 2026

किडनी कैंसर पर जागरूकता जरूरी शराब और धूम्रपान बढ़ाते हैं जोखिम, समय पर पहचान से बच सकती है जान

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नई द‍िल्‍ली । किडनी कैंसर दुनिया भर में तेजी से बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। यह वैश्विक स्तर पर 14वां सबसे आम कैंसर माना जाता है, जिसमें हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी होती है। पुरुषों, बुजुर्गों और विकसित देशों में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी केवल इन्हीं वर्गों तक सीमित नहीं है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किडनी कैंसर का समय पर पता चल जाए तो सर्जरी, थेरेपी और अन्य आधुनिक उपचारों के माध्यम से मरीज की जान बचाई जा सकती है। समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज कठिन हो जाता है।

किडनी कैंसर को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं, जो इसके समय पर निदान और उपचार में बाधा बन सकती हैं। एक आम धारणा यह है कि यह बीमारी केवल बुजुर्गों को होती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन युवाओं में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं। शोध बताते हैं कि 50 वर्ष से कम उम्र के लगभग एक तिहाई मामलों में यह बीमारी पाई जा सकती है। खराब जीवनशैली, धूम्रपान, शराब का सेवन, आनुवांशिक कारण और पहले से मौजूद किडनी संबंधी बीमारियां इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

एक और आम मिथक यह है कि पेशाब में खून आना हमेशा किडनी कैंसर का संकेत होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्षण कई अन्य बीमारियों में भी दिख सकता है, जैसे यूटीआई या संक्रमण। हालांकि यदि कई दिनों तक पेशाब का रंग लाल, बरगंडी या गहरा दिखाई दे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

लिंग को लेकर भी एक गलत धारणा है कि महिलाओं में किडनी कैंसर का खतरा अधिक होता है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। पुरुषों में इसका जोखिम महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुना पाया गया है। इसका एक कारण धूम्रपान और कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों के संपर्क में आना भी माना जाता है। हालांकि बार-बार होने वाले यूटीआई या संक्रमण से ग्रस्त महिलाओं को भी नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए।

इसके अलावा यह भी एक मिथक है कि शराब का सेवन केवल लिवर को नुकसान पहुंचाता है, किडनी को नहीं। डॉक्टरों के अनुसार शराब और धूम्रपान दोनों ही किडनी कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। ये आदतें शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर के विकास की संभावना को बढ़ा देती हैं। अनुमान के अनुसार, इन आदतों के कारण पुरुषों में लगभग 30 प्रतिशत और महिलाओं में लगभग 25 प्रतिशत किडनी कैंसर के मामले जुड़े हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण कदम है। स्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान और शराब से दूरी, नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। सही समय पर पहचान और इलाज से इस गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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