September 10, 2026

ट्रंप ने किया H-1B Visa की नई फीस को सपोर्ट…. बोले- 'अमेरिकी वर्कर को मिले जॉब

0
00000000000-1789020343

वाशिंगटन।
अमेरिका (America) में H-1B वीजा (US H-1B Visa) सरकार के निशाने पर आ चुका है और इसके जरिए विदेशों से होने वाली हायरिंग को मुश्किल बनाया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने H-1B वीजा याचिका पर लगाई जाने वाली फीस को लेकर पेश किए गए एक प्रस्ताव को सपोर्ट किया है। उनका कहना है कि इससे कंपनियां अब विदेश से स्किल वर्कर को लाने से पहले अमेरिकी वर्कर्स को नौकरी और ट्रेनिंग देंगी। फीस से उन्हें ऐसा करने का प्रोत्साहन मिलेगा।

अमेरिका में लेबर डे के मौके पर दिए गए एक संदेश में उन्होंने H-1B वीजा को लेकर ये सारी बातें कही हैं। ट्रंप ने कहा, ‘ये तय करने के लिए कि हम अमेरिकी वर्कर्स को काम पर रखें और उन्हें ट्रेनिंग दें, हम H-1B वीजा याचिकाओं पर एक नई फीस का प्रस्ताव रख रहे हैं। इससे कंपनियां विदेश से लेबर देखने से पहले योग्य अमेरिकियों में निवेश करने के लिए प्रेरित होंगी।’ उनके इस बयान के बाद अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों की परेशानियां बढ़ गई हैं।


जिस प्रस्ताव को ट्रंप ने सपोर्ट किया, उसमें क्या है?

दरअसल, ट्रंप के संदेश में जिस फीस का जिक्र किया गया है, वो लेबर डे पर शुरू किया गया कोई नया चार्ज नहीं है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने इससे पहले कैप-सब्जेक्ट H-1B आवेदनों के लिए 1,03,265 डॉलर (लगभग 97 लाख रुपये) की फीस का प्रस्ताव रखा था। इस फीस से एडवांस डिग्री यानी मास्टर्स-पीएचडी वाले लोगों को भी छूट नहीं दी जा रही है। ये प्रस्तावित फीस मौजूदा इमिग्रेशन खर्चों के अलावा, H-1B याचिका दाखिल करते समय चुकानी होगी। ये कदम फेडरल रेगुलेटरी प्रोसेस का हिस्सा है और फिलहाल कोई एक्टिव चार्ज नहीं है।


अमेरिकी कंपनियां अब वापस लौट रहीं देश: ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्तावित H-1B फीस को डॉमेस्टिक एंप्लॉयमेंट और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के अपने बड़े अभियान से जोड़ा है। उनकी लेबर डे की स्पीच का फोकस अमेरिकी वर्कर्स, इंडस्ट्रियल कंपनियां और ट्रेड नीतियां रहीं। ट्रंप ने कहा, ‘दशकों से विनाशकारी ट्रेड पॉलिसी की वजह से हमारी इंडस्ट्रियल ताकत दूसरे देशों को सौंप दी गई, अब कंपनियां वापस लौट रही हैं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में खरबों डॉलर निवेश कर रही हैं और 9 लाख से ज्यादा जॉब्स जोड़ी गई हैं।’


भारतीयों की चिंता क्यों बढ़ी?

दरअसल, अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम के जरिए बड़ी टेक कंपनियां और अन्य सेक्टर्स की कंपनियां स्किल वर्कर्स की हायरिंग करती हैं। H-1B वीजा पाने में भारतीय सबसे आगे रहते हैं। 2024 में अकेले वीजा का 71% भारतीयों को मिला। इस वीजा पर जॉब करने वाले भारतीयों को ये डर सता रहा है कि अगर उनकी नौकरी चली जाती है और फिर ये नई फीस लागू हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में अमेरिकी कंपनियां उन्हें दोबारा से नौकरी नहीं देंगी।

अमेरिकी कंपनियों के लिए उनकी हायरिंग महंगी हो जाएगी। इसी तरह से अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय भी चिंतित हैं, क्योंकि नई फीस के दायरे में वो भी होंगे। कोई भी कंपनी इतनी महंगी फीस देकर उन्हें भी नौकरी देने से बचेगी। भारत में भी जो लोग अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने का प्लान कर रहे हैं, उनके लिए भी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं, क्योंकि उन्हें भी वीजा पाने में दिक्कत आ सकती है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *