September 20, 2026

ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे ऊर्जा खरीदार देशों पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

0
10-1789891392
नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े एचआर 5334 विधेयक पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया। इस कानून में रूस पर प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों को लागू करने तथा उनका दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे जारी रखने की व्यवस्था भी की गई है।

ट्रंप के इस फैसले पर भारत में कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि किसी धौंस जमाने वाले का मुकाबला करने का एक ही तरीका है और वह है मजबूती से उसका प्रतिरोध करना।

नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसमें रूस के ऊर्जा कारोबार और उससे जुड़े प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था है। रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।

कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध नीति का प्रभाव बढ़ सकता है। हालांकि कानून पर हस्ताक्षर होने के साथ भारत पर तत्काल कोई नया टैरिफ लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है।

विधेयक में रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और रक्षा कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के प्रावधान भी शामिल हैं। रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने वाले देशों और संस्थाओं पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य रूस के आर्थिक और रणनीतिक नेटवर्क पर प्रतिबंधों का प्रभाव मजबूत करना है।

कानून में रूस के ऊर्जा निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर भी ध्यान दिया गया है। इसके जरिए प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई का रास्ता तैयार किया गया है। रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ और अन्य प्रतिबंधों का इस्तेमाल किए जाने की व्यवस्था की गई है।

ईरान को लेकर भी कानून में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। इसमें ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इस तरह रूस के साथ ईरान को लेकर भी अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था को कानूनी आधार मिला है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इस विधेयक को 16 सितंबर 2026 को मंजूरी दी थी। इसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया। 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया।

भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस के साथ उसका ऊर्जा कारोबार लंबे समय से जारी है। रूस भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भारत के आर्थिक और ऊर्जा हितों से जुड़ता है।

जयराम रमेश की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा भारत की राजनीतिक बहस में भी सामने आया है। नए कानून के तहत भारत पर तत्काल कोई नया शुल्क लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि आगे अमेरिकी प्रशासन इस कानून के प्रावधानों का किस तरह इस्तेमाल करता है, इससे भारत समेत रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर संभावित प्रभाव स्पष्ट होगा।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *