June 20, 2026

सार्वजनिक मंच पर पारंपरिक नियमों की अनदेखी पर ईरानी गायिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश

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नई दिल्ली । ईरान में सख्त इस्लामी ड्रेस कोड और हिजाब नियमों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वहां की एक अदालत ने देश की मशहूर गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब के सार्वजनिक रूप से उपस्थित होने और स्लीवलेस ड्रेस पहनने के आरोप में 74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद से न केवल ईरान के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कला जगत से जुड़े लोगों में गहरा असंतोष और आक्रोश देखा जा रहा है। इस सख्त कानूनी कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, गायिका परस्तू अहमदी हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक हिजाब को छोड़कर बिना सिर ढके और स्लीवलेस पोशाक में नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद ईरान के रूढ़िवादी प्रशासन और नैतिक पुलिस ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई करते हुए स्थानीय अदालत ने इसे देश के शरिया कानूनों और सार्वजनिक शालीनता के नियमों का खुला उल्लंघन माना और गायिका को कोड़े मारने की कठोर सजा मुकर्रर कर दी।

ईरान में साल 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद से ही महिलाओं के पहनावे और हिजाब को लेकर कानून बेहद सख्त कर दिए गए हैं। प्रशासन लगातार सार्वजनिक स्थानों, सांस्कृतिक आयोजनों और सोशल मीडिया पर महिलाओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है। परस्तू अहमदी जैसी लोकप्रिय हस्ती पर इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करके प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, चाहे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा कितनी भी बड़ी क्यों न हो।

इस अदालती फैसले के सार्वजनिक होने के बाद से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार की कड़ी आलोचना शुरू कर दी है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि कलाकारों पर इस प्रकार की शारीरिक प्रताड़ना की सजा थोपना पूरी तरह से अमानवीय है और यह महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन है। सोशल मीडिया पर भी दुनिया भर के लोग गायिका के समर्थन में आ गए हैं और इस दंडात्मक कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर ईरान के सख्त कानूनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच चल रहे पुराने संघर्ष को वैश्विक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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