March 8, 2026

पाकिस्तान में परमाणु बम चलाने का अधिकार अब सेना के पास

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– पाकिस्तानी संसद ने संविधान संशोधन विधेयक पारित किया

इस्लामाबाद, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने बुधवार को दो तिहाई बहुमत से विवादित 27 वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कर दिया। उच्च सदन सीनेट सोमवार को ही इस विधेयक को पारित कर चुका है। माना जा रहा है कि देर रात तक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी विधेयक पर हस्ताक्षर कर देंगे और वह कानून के रूप में प्रभावी हो जाएगा। इसी के साथ पाकिस्तान में तीनों सेनाओं के प्रमुख को नए अधिकार मिल जाएंगे। इन अधिकारों में चीफ आफ डिफेंस फोर्सेज को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के निर्णय के लिए कमान गठित करने का अधिकार मिल जाएगा।
पाकिस्तान की राजनीति में विवाद का सबब बना यह विधेयक मंगलवार को कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने नेशनल असेंबली में पेश किया था। उन्होंने बताया कि विधेयक के कानूनी प्रविधानों पर देश के वकीलों की कई बार काउंसिल और बार एसोसिएशन ने देखा है और उसके विधिसम्मत होने पर मुहर लगाई है। करीब दो दिन चली चर्चा के बाद सदन ने दो तिहाई बहुमत से 59 नए प्रविधानों वाले संविधान संशोधन विधेयक को पारित किया। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सदस्यों ने विधेयक पर कड़ा विरोध जताया और उसकी प्रतियां फाड़कर प्रधानमंत्री के आसन की ओर उछाल दीं। बाद में विपक्षी सांसद प्रत्येक प्रविधान के लिए हो रहे मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार कर सदन से बाहर चले गए। मतदान के बाद स्पीकर अयाज सदीक ने बताया कि विधेयक के पक्ष में 234 वोट पड़े जबकि विरोध में केवल चार सदस्यों ने वोट डाला। मतदान के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी भी नेशनल असेंबली में मौजूद थे।
संशोधन विधेयक के अनुसार प्रधानमंत्री की संस्तुति पर राष्ट्रपति सेना प्रमुख और तीनों सेनाओं के प्रमुख को नियुक्त करेंगे। सेना प्रमुख, जो तीनों सेनाओं का प्रमुख भी होगा, वह प्रधानमंत्री के विमर्श से नेशनल स्ट्रैटजिक कमांड के प्रमुख की नियुक्ति करेगा। नई व्यवस्था में नेशनल स्ट्रैटजिक कमांड का प्रमुख पाकिस्तानी सेना का अधिकारी होगा। यही कमांड परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर निर्णय लेगी। जबकि फील्ड मार्शल बनने वाले सैन्य अधिकारी के पास ताउम्र यह ओहदा रहेगा। भारत के साथ चार दिन चले सैन्य टकराव के कुछ दिन बाद ही पाकिस्तान सरकार ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया था। पाकिस्तान में उनसे पहले केवल अयूब खान को फील्ड मार्शल बनाया गया था।
पारित विधेयक में संविधान से जुड़े मामलों की निगरानी-सुनवाई के लिए संघीय संवैधानिक न्यायालय के गठन का भी प्रविधान है। जबकि देश का सुप्रीम कोर्ट केवल माल और फौजदारी के मुकदमों की सुनवाई करेगा। विपक्षी दलों के गठबंधन-तहरीक तहफुज आईन-ए-पाकिस्तान ने नए कानून का देश भर में विरोध करने का एलान किया है। तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख गौहर अली खान ने कहा है कि नया कानून लागू होने के बाद देश में लोकतंत्र केवल नाम के लिए ही रह जाएगा।

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