September 12, 2026

‘भारत से दुनिया में जाए शांति का संदेश’, ईरानी राष्ट्रपति से भारतीय धर्मगुरुओं ने की मुलाकात

0
irani-president-1789196722


नई दिल्ली।
भारत के विभिन्न धर्मगुरुओं ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक शांति, न्याय, मानवता और संवाद के जरिए विवादों के समाधान पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि भारत की धरती से पूरी दुनिया के लिए शांति और भाईचारे का संदेश जाना चाहिए।

हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के विभिन्न धर्मगुरु मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की धरती से ‘सबके लिए प्यार और किसी से नफरत नहीं’ का संदेश दिया जाता रहा है। आज जब दुनिया के कई बड़े नेता भारत में एकत्र हुए हैं, तब इस संदेश का महत्व और बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि संदेश स्पष्ट है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अगर अन्याय होता है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए। भारत हमेशा न्याय, करुणा, दया और एकता जैसे मूल्यों पर विश्वास करता रहा है। पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हुए सभी को मिलकर मानवता की सेवा करनी चाहिए।

आचार्य लोकेश मुनि ने ईरान में शांति सम्मेलन का दिया प्रस्ताव

जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य लोकेश मुनि ने बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को ईरान में शांति सम्मेलन आयोजित करने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया की नजर इस समय भारत पर है और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच शांति के लिए पहल करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि धर्मगुरुओं का स्पष्ट मानना है कि युद्ध, हिंसा और आतंक किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं। विवादों को बातचीत, संवाद और शांति के प्रयासों के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति ने शांति सम्मेलन के उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है।

उन्होंने बताया कि जल्द ही एक मंच पर धर्मगुरुओं और दुनिया में शांति की इच्छा रखने वाली ताकतों को एकत्र किया जाएगा। इस मंच के जरिए बातचीत और संवाद के माध्यम से वैश्विक शांति की दिशा में प्रयास करने की योजना है।

मीरवाइज उमर फारूक ने युद्ध खत्म करने की अपील की

मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि बैठक में धर्मगुरुओं, कारोबारी प्रतिनिधियों और विद्वानों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सबसे बड़ा संदेश शांति का होना चाहिए। नई दिल्ली में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दुनिया के बड़े नेताओं की मौजूदगी इस संदेश को और प्रभावी बनाती है।

फारूक ने कहा कि स्थायी शांति तभी संभव है, जब न्याय सुनिश्चित हो। उन्होंने ईरान की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान पर थोपा गया युद्ध गलत है। उन्होंने फलस्तीन और लेबनान के हालात का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं के कारण दुनिया में अराजकता की स्थिति पैदा हो रही है और इसका समाधान जरूरी है।

उन्होंने बताया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी मानवता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। उनके मुताबिक, अगर शांति की दिशा में आगे बढ़ना है तो इंसानियत को सबसे अधिक महत्व देना होगा। आज का समय बातचीत और कूटनीति का है, युद्ध का नहीं।

‘अब युद्ध खत्म करने का समय’

मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि मानव मूल्यों में विश्वास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति की पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब युद्ध खत्म करने और बातचीत को मौका देने का समय है। उनके मुताबिक, गंभीर वैश्विक संकट का समाधान निकालने का रास्ता बातचीत और समझौते की प्रक्रिया से ही निकल सकता है।

भारत और ईरान के संबंधों का उल्लेख करते हुए फारूक ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जहां भी ज्यादती और जुल्म हो रहा है, उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने ईरान और फलस्तीन का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतों को मिलकर मजबूत संदेश देना चाहिए कि युद्ध समाप्त होना चाहिए और बातचीत एवं कूटनीति को अवसर दिया जाना चाहिए।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *